BTC : दो नहीं 'तीन साल' का हुआ बीटीसी

कानपुर : उलझी प्रवेश प्रक्रिया के कारण बीटीसी शिक्षा सत्र पटरी से उतर गया है। बीते साल दो साल के पाठ्यक्रम की डिग्री तीन सालों में मिली जबकि इस बार का सत्र और भी उलझ गया है। डायट व निजी कालेजों में अलग-अलग प्रवेश और परीक्षा की स्थिति है।


नगर में डायट के अतिरिक्त निजी कालेजों में भी द्विवर्षीय बीटीसी पाठ्यक्रम संचालित है। एक सेमेस्टर में कम से कम सौ दिन पढ़ाई होनी चाहिए। नया सत्र पहली जुलाई से शुरू होने का नियम है परंतु तीन वर्षो से यह समय से शुरू नहीं हो पा रहा है। 2012-13 के प्रवेश दो जुलाई 2012 तक हो जाने चाहिए थे परंतु डायट में जनवरी 2013 और निजी कालेजों में अप्रैल तक हुए। डायट में जहां पहले सेमेस्टर के परीक्षाफार्म भरे जा रहे हैं वहीं निजी कालेजों में अभी आधी पढ़ाई भी पूरी नहीं हुई है। उधर सत्र 2011-12 जून में पूरा हो जाना चाहिए था पर अभी चौथा सेमेस्टर चल रहा है। निजी कालेजों में तो सत्र और भी पिछड़ा है। नतीजतन बीटीसी कालेजों में साल भर प्रवेश, साल भर परीक्षा की स्थिति बन गई है। निजी कालेजों में तीन से सात तक सीटें खाली रह गई।

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यह है बीटीसी की तस्वीर

प्रदेश में निजी कालेज : 453

नगर में निजी कालेज : 07

नगर डायट में सीटें : 100

निजी कालेजों में सीटें : 350

डायट में प्रवेश : जनवरी 2012

निजी में पहला बैच : 31 मार्च 12

दूसरा बैच आया : 30 अप्रैल 12

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क्या हैं कमजोरियां

- समय से नहीं मिलती काउंसलिंग की अनुमति

- मान्यता विस्तरण की फंसी रहती हैं फाइलें

- डायट व निजी कालेजों की एक साथ प्रवेश व्यवस्था नहीं

- कई कई बार काउंसलिंग से होती प्रवेश में देरी

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डायट व निजी कालेजों में अलग अलग प्रवेश से पढ़ाई में एकरूपता नहीं हो पाती। चालू सत्र की डिग्री सितंबर 2014 में मिलनी चाहिए जो अब 2015 में मिलने की संभावना है।

-विनय त्रिवेदी, अध्यक्ष उप्र स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसो.

निजी कालेजों को डायट के बाद प्रवेश मिले हैं। सौ दिन की पढ़ाई के बाद पहले सेमेस्टर की परीक्षा कराई जाएगी। प्रवेश में देरी के चलते सत्र पिछड़ा है। -पीके उपाध्याय, प्रधानाचार्य डायट
 
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