• यूरोपीय औपनिवेशिक शक्तियाँ भारत में अपने साथ यूरोपीय वास्तु व स्थापत्य कला भी लाईं। उन्होंने भारत में कई ऐसी इमारतों का निर्माण कराया जिनमें नव्य शास्त्रीय, रोमांसक्यू, गोथिक व नवजागरण शैलियों का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है। 
  • भारत में सबसे पहले पुर्तगालियों का प्रवेश हुआ जिन्होंने गोवा में कई चर्र्चों का निर्माण कराया जिनमें पुर्तगाली-गोथिक शैली की झलक दिखाई देती है। 
  • 1530 में गोवा में निर्मित सेंट फ्रांसिस चर्च देश में यूरोपीयों द्वारा बनवाया पहला चर्च माना जाता है।
  • भारतीय स्थापत्य कला पर सबसे ज्यादा प्रभाव ब्रिटेन का पड़ा। उन्होंने स्थापत्य कला का उपयोग शक्ति प्रदर्शन के लिए किया। 

  • भारत के ब्रिटिश शासकों ने गोथिक, इम्पीरियल, क्रिश्चियन, इंग्लिश नवजागरण और विक्टोरियन जैसी कई यूरोपीय शैलियों की इमारतों का निर्माण कराया। 
  • अंग्रेजों द्वारा भारत में अपनाई गई शैली को इंडो-सारासेनिक शैली कहते हैं। यह शैली हिंदू, इस्लामिक, और पश्चिमी तत्वों का खूबसूरत मिश्रण थी। मुंबई में अंग्रेजों द्वारा बनवाया गया विक्टोरिया टर्मिनल इसका सबसे सुंदर उदाहरण है।
  • नई दिल्ली के स्थापत्य व वास्तु कला को अंग्रेजी राज का चरमोत्कर्ष माना जा सकता है। अंग्रेजों ने इस शहर का निर्माण अत्यंत ही योजनबद्ध तरीके से करवाया था। सर एडवर्ड लुटयंस इस शहर के प्रमुख वास्तुकार थे |

Post a Comment Blogger

 
Top