CTET Exam Notes : Child Development and Pedagogy (CDP) 

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Topic  : Language & Thought

चिंतन - विशेषताएं व विशिष्ट नियम:-

चिंतन अवधारणाओं, संकल्पनाओं, निर्णयों तथा सिद्धांतो आदि में वस्तुगत जगत को परावर्तित करने वाली संक्रिया है जो विभिन्न समस्याओं के समाधान से जुड़ी हुई है। चिंतन विशेष रूप से संगठित भूतद्रव्य-मस्तिष्क- की उच्चतम उपज है। चिंतन का संबंध केवल जैविक विकासक्रम से ही नहीं अपितु सामाजिक विकास से भी है।
चिंतन का उद्भव लोगों के उत्पादन कार्यकलाप की प्रक्रिया के दौरान होता है और वह यथार्थका व्यवहृत परावर्तन सुनिश्चित करता है। अपने विशिष्ट मूल, क्रियाकलाप के ढंग और परिणामों की दृष्टि से उसका स्वरूप सामाजिक होता है। इसकी पुष्टि इस बात में है कि चिंतन श्रम तथा वाणी के कार्यकलाप से, जो केवल मानव समाज की अभिलाक्षणकताएं हैं, अविच्छेद्य रूप में जुड़ा हुआ है। इसी कारण मनुष्य का चिंतन वाणी के साथ घनिष्ठ रखते हुए मूर्त रूप ग्रहण करता है और उसका परिणाम भाषा के रूप में व्यक्त होता है।

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चिंतन की सामान्य विशेषताएं ( General Characteristics of Thinking ) 

चिंतन के मुख्य विशिष्ट नियम

संक्रियात्मक दृष्टि से चिंतन तार्किक संक्रियाओं ( logical operations ) की एक पद्धति है, जिनमें से प्रत्येक संक्रिया, संज्ञान ( cognition ) की प्रक्रिया में एक निश्चित भूमिका अदा करती है और अत्यंत जटिल ढ़ंग से अन्य संक्रियाओं - विश्लेषण ( analysis ), संश्लेषण (synthesis ) तथा सामान्यीकरण ( generalization ) - आदि से जुड़ी होती है।

विश्लेषण ( analysis )

सामान्यीकरण ( generalization )

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