CTET Exam Notes : Child Development and Pedagogy (CDP) in Hindi Medium


पिछड़े बालक (Slow Learner)

शिक्षा मनोविज्ञान की दृषिट से ऐसे बालक पिछड़े हुए कहलाते है जो अपनी आयु के अन्य साथियों के साथ समान गति से आगे नहीं बढ़ पाते। दूसरे शब्दों में हम यह कह सकते है कि पिछड़े हुए बालक वे बालक हैं जो जो सीखना तो चाहते हैं लेकिन उनके सीखने की गति अपनी आयु के अन्य बालकों की तुलना में कम होती है जिसके कारण वे कक्षा एवं विदयालय की विभिन्न गतिविधियों में पिछड़ जाते हैं।
पिछड़े बालक का मन्दबुद्धि  होना आवश्यक नहीं है। पिछड़ेपन के अनेक कारण हैं, जिनकी चर्चा हम आगे करेंगें। उन कारणों में से मन्दबुद्धि होना एक कारण हो सकता है। इसी स्थति को पिछड़ापन कहते हैं।
शैक्षिक रूप से पिछड़े हुए बालक कठिन एवं लगातार प्रयत्न करते हैं, पढ़ते हैं, समझने की कोशिश करते हैं और उपलबिध् स्तर प्राप्त करने की कोशिश करते हैं लेकिन वे अपेक्षाकृत कम प्राप्त कर पाते हैं, क्योंकि उनके सीखने की गति औसत से कम होती है। शिक्षक उनको पढ़ा नहीं पाते हैं क्योंकि वे समझ नहीं पाते हैं। यहाँ तक कि शिक्षक उनको अपनी तरपफ से अच्छे से अच्छे तरीके से समझाने का प्रयत्न करे तब भी वे सोचते ही रहते हैं। उनके दिमाग औसत बालकों की तुलना में स्थिर हैं। विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने शैक्षिक रूप से पिछड़े हुए बालकों को निम्न प्रकार परिभाषित किया है।


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पिछड़े बालकों की विशेषताएँ:-


पिछड़े बालक की विशेष समस्याएँ

बालकों में पिछड़ेपन या शैक्षिक मन्दता के कारण:-


पिछड़ेपन या मन्दता निवारण के उपाय

पिछड़े बालक की शिक्षा

अभिभावकों, शिक्षकों एवं समुदाय का उत्तदायित्त्व 

सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से वंचित बालक

वंचना से अभिप्राय

वंचन का क्षेत्र एवं प्रकृति-

वंचित बालकों की पहचान एवं सहयोग-


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