CTET 2015 EXAM NOTES


समूह निर्देशित अनुदेशन नमूने (Group directed Instructional Modules)


स्वं विकास के लिये समूह निर्देशित विधियां अधिक उपयुक्त रहती हैं। विद्यार्थी समूह में रहकर क्रियाशील रहता है। वह अपने अनुभव तथा दूसरों के विचारो से ज्ञान प्राप्त करता हैं। वह केवल ज्ञानात्मक विकास ही नहीं करता अपितु समूह में उसे भावात्मक विकास का भी अवसर प्राप्त होता है उसमें सहानूभूति, प्रेम, सहयोग, भातृभाव की भावना का विकास होता है। लोकतन्त्रात्मक शासन प्रणाली में सामाजिक विकास आवश्यक ही नही अनिवार्य भी है।



कुछ समूह निर्देशित अनुदेशन माडयूल (नमूने) इस प्रकार हैं-

1. विवेचन या परिचर्चा (Discussion)

वर्तमान समय में विवेचन प्रविधि का अधिक से अधिक प्रयोग होने लगा है। किन्तु विवेचन किसे कहते हैं, यह समझना सरल नहीं, यह प्रविधि ही सरल है। इसकी तकनीक अत्यन्त जटिल है। यह शिक्षक की योग्यता पर केन्द्रित है। वैसे तो जब भी दो चार व्यक्ति इक्ट्ठे होकर आपस में किसी विषय पर विचार प्रकट करते हैं, हम उसे परिचर्चा का नाम दे देते हैं। किन्तु इस प्रकार की बातचीत कक्षा-शिक्षण की विवेचन प्रविधि से बहुत विभिन्न है। 
बेलिग्टन एवं बेलिग्टन के अनुसार विवेचन प्रविधि शिक्षक की ओर से एक प्रयास है जो विद्यार्थी की आवश्यकताओं का शिक्षक के पाठ्य विषय सम्बन्धी चिन्तन के उद्देश्यों के साथ सम्मेलन कराने के हेतु होता है। यह कक्षा की उन क्रियाओं को मनोनीत करता है जिनमें शिक्षक तथा विद्यार्थी सहयोग से कुछ समस्याओं पर विचार करते हैं। विवेचन में प्रकरण पर बुद्धिमतापूर्ण विचार होता है। सम्बन्धों का विश्लेषण होता है तुलना होती है, मूल्यांकन होता है तथा निष्कर्ष निकाले जाते हैं। विवेचन की सफलता शिक्षक की इस योग्यता पर निर्भर होती है कि वह कितना विद्यार्थियों के कार्य में सहयोग प्राप्त कर सकता है

दृश्य-श्रव्य सामग्री द्वारा विद्यार्थियों को प्रकरण पर विवेचन करने की प्रेरणा दी जा सकती है। विवेचन को प्रारम्भ करने से पहले समस्या का चुनाव आवश्यक है। समस्या दो-पक्षीय होनी चाहिए। विवेचन के लिए समस्या का चुनाव उसमें प्रश्न पूछने की कला पर निर्भर करता है। प्रश्न ऐसे हों जिसमें बच्चे रूचि लें। प्रश्न जटिल नहीं होने चाहिएं ताकि विद्यार्थी परिचर्चा में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित हो।

वादविवाद एवं शास्त्रार्थ (Debate)

वाद विवाद एवं शास्त्रार्थ का मुख्य उद्देश्य यह है कि छात्रों को आत्माभिव्यक्ति का विकास हो। इनके द्वारा छात्रों को वस्तु चयन, भावाभिव्यक्ति, पक्ष विपक्ष के लिए विचारों के नियमन एवं जनता के सामने प्रभावपूर्ण रूप से भाषण देने का उचित प्रशिक्षण मिलता है। भाषण करते हुए वक्ता को मंच के भय से हटाकर पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपने आपको अभिव्यक्त करना पड़ता है। वह वक्तव्य में पूरी योग्यता प्राप्त करता है। 
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वाद विवाद में भाग लेने पर छात्रा के भाषा ज्ञान की वृद्धि के साथ साथ नवीन शब्दों को सीखने की प्रेरणा भी प्राप्त होती है। उसे साक्षात्कार के समय आत्माभिव्यक्ति में कठिनाई नहीं आती। मीकाउन के अनुसार: ‘‘आधुनिक जीवन में स्वस्थ खिलाडी़पन, आत्मविश्वास, आत्मसन्तोष, शुद्ध आचरण तथा तत्सम्बन्धी गुणों की ग्राह्यता की बौद्धिक अभिरूचि, पात्राता, आत्माभिव्यंजना, नीर-क्षीर-विवेक, बुद्धि तथा प्रतिभा आदि की मात्रा स्कूलों में अत्यन्त न्यून रूप में विद्यमान है।’’

वाद विवाद का प्रबन्ध अत्यन्त सरल कार्य नहीं है। अध्यापक को इसके लिये परिपूर्ण योजना की आवश्यकता है। वाद विवाद के विषय की घोषणा पर्याप्त समय पहले कर देनी चाहिए। स्थान तथा तिथि की जानकारी करवाना भी अनिवार्य है। वक्ताओं में से प्रथम वक्ता को वाद विवाद सम्बन्धी तथ्यों से जानकारी कराना एवं उसे अथ-इति की विधि समझाना आवश्यक है। निर्णायकों की नियुक्ति करके उन्हें वाद विवाद सम्बन्धी नियमों से परिचित कराना भी बहुत ही जरूरी है। वाद विवाद का विषय रूचिपूर्ण होना चाहिए, ताकि सभी लोग भावग्रहणता के आधार पर उसमें रस ले सके।

3. संगोष्ठी (Symposium)

संगोष्ठी औपचारिक होती है इसमें एक विषय चुना जाता है और इसमें एक अतिरिक्त पद होता है। संगोष्ठी के प्रथम भाग में प्रत्येक समूह सदस्य द्वारा बारी बारी से तैयार की हुई स्पीच (भाषण) दी जाती है। इसके पश्चात् समूह सदस्यों में विवेचन होता है और फिर श्रोता प्रश्न करते हैं।

4. पेनल विवेचन विधि (Panel Discussion)

कक्षा के छः या आठ विद्यार्थी किसी प्रकरण को गहराई से अध्ययन के लिये चुन लिये जाते हैं। प्रत्येक सदस्य प्रकरण के एक उपभाग को अपने अध्ययन के लिए चुन लेता है। जब सब अपने को विवेचन के लिए तैयार कर लेते हैं तो कक्षा के सम्मुख पेनल विवेचन प्रस्तुत किया जाता है। पेनल का प्रत्येक सदस्य जो उप प्रकरण उसने चुना है, उस पर एक छोटा कथन देता है। इसके पश्चात् बातचीत के रूप में पेनल विवेचन पेनल के सदस्यों के बीच प्रारम्भ हो जाता है। पेनल का एक चेयरमैन भी होता है जो विवेचन पर नियन्त्राण रखता है। पेनल विवेचन के पश्चात् प्रकरण सम्पूर्ण कक्षा के विवेचन के लिए खोल दिया जाता है। अन्त में चेयरमैन संक्षेपीकरण दे देता है।

5. गोलमेज विवेचन (Round Table Discussion)

गोल मेज विवेचन गोलमेज पेनल से इस बात में विभिन्न है कि इसमें विवेचन सदस्यों के बीच ही होता है, इसमें श्रोता कोई भाग नहीं लेते। इसका प्रयोग किसी विषय वस्तु में जनता की रूचि जागृत करने के लिए ही बहुधा होता है। समूह अनुदेशन प्रविधियों में शिक्षक का उत्तरदायित्व बहुत अधिक है या हो जाता है। उसे समय समय पर विद्यार्थियों का पथ-प्रदर्शन करते रहना चाहिए। कक्षा में यथासम्भव अस्वस्थ बहस को पनपने नहीं देना चाहिए। 

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