CTET 2015 Exam Notes : Child Development and Pedagogy (CDP) in Hindi Medium


अभिप्ररेणा (MOTIVATION)- अर्थ एवं प्रकार :-  


‘‘घोड़े को पानी तक ले जा सकते है परंतु उसे पानी पीने के लिये विवश नहीं कर सकते।’’ अतः अभिप्ररेणा की आवश्यकता है जिससे अधिगमार्थी सीखने में रूचि लेने लगे।प्रेरणा के शाब्दिक और मनोवैज्ञानिक अर्थों में अन्तर है। प्रेरणा के शाब्दिक अर्थ में हमें किसी कार्य को करने का बोध होता है। इस अर्थ में हम किसी भी उत्तेजना को प्रेरणा कह सकते है। क्योंकि उत्तेजना के अभाव में किसी प्रकार की प्रतिक्रिया संभव नहीं है।

गुड के अनुसार- ‘‘प्रेरणा कार्य को प्रारंभ करने, जारी रखने और नियमित करने की प्रक्रिया है।’’

शिक्षा एक जीवन पर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है तथा प्रत्येक क्रिया के पीछे एक बल कार्य करता है जिसे हम प्रेरक बल कहते है। इस संदर्भ में प्ररेणा एक बल है जो प्राणी केा कोई निश्चित व्यवहार या निश्चित दिशा में चलने के लिये बाध्य करती है।

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प्रेरणा  के प्रकार:-


अभिप्रेरणा के स्रोत -


अभिप्ररेणा का सीखने  में  महत्व:-

अभिप्रेरणा विकसित करने की विधियां:-


फ्रेन्डसन के अनुसार ‘‘प्रभावी अधिगम प्रभावशाली प्रेरणा पर निर्भर करता है।’’ जितनी अच्छी प्रेरणा होगी उतना ही बेहतर सीखना। अतः शिक्षक को कक्षा में छात्रों को प्रेरित करने में निम्नलिखित विधियां अपनानी चाहिएः-
1. पुरस्कार एवं दण्ड।
2. प्रशंसा एवं निन्दा।
3. सफलता व असफलता।
4. प्रतियोगिता एवं सहयोग।
5. प्रगति का ज्ञान।
6. आकांक्षा का स्तर।
7. नवीनता।
8. रूचि।
9. आवश्यकताओं का ज्ञान।
10. कक्षा का वातावरण।


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