CTET 2015 EXAM NOTES IN HINDI MEDIUM

दत्त-कार्य विधि : Assignment Method

दत्त कार्य दैनिक पाठ योजना का एक महत्वपूर्ण अंग है जिसके द्वारा कक्षा की क्रियाऐं संगठित एवं निर्देशित होती हैं। यह शैक्षिक क्रियाओं को दिशा देने का मुख्य साधन होता है। यह कक्षा के कमरे में या उससे बाहर दूसरे दिन के कार्य की तैयारी के लिए भी आवश्यक है।

मनोवैज्ञानिक रूप से दत्त कार्य सीखने की क्रियाओं के लिए अभिप्रेरणा प्रदान करता है। जहाॅं यह सीखने के लिए
अभिप्रेरक नहीं होता वहां इसे सीखने की स्थिति प्रदान करनी चाहिए और इस प्रकार प्रभावशाली शिक्षण कार्य की ओर सहायता देनी चाहिए। यदि सीखने की स्थिति उपयुक्त है तो विद्यार्थी का बहुत सा समय नष्ट होने से बच जाता है। दत्त कार्य, कार्य की ओर वांछित अभिवृतियों को स्थापित करता है और सीखने की क्रियाओं में विद्यार्थियों का पूर्ण मन के साथ सहयोग प्राप्त करता है।

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दत्त कार्य के विशिष्ट उद्देश्य (Specific Objectives of Assignments)



एक अच्छे दत्त कार्य की विशेषताऐं (Characteristics of a Good Assignment)


दत्त-कार्यों के प्रकार (Types of Assignments)


दत्त-कार्य कब दिया जाये?


दत्त-कार्य का सबसे प्रचलित समय कक्षा के घण्टे की समाप्ति के निकट है। यह समय उचित भी है। विशेष रूप से उस समय जब दत्त-कार्य घण्टे के अन्दर किये हुए कार्य पर निर्भर होता है और दूसरे दिन का कार्य का विस्तार होता है। इस रूप में दत्त-कार्य को कक्षा के कार्य का ही अंग समझना चाहिए।

जब कक्षा में किसी नये कार्य का प्रवेश करवाना है तो उनके शिक्षक कक्षा के घण्टे के आरम्भ में ही दत्त-कार्य देना अच्छा समझते हैं, इस प्रकार दत्त-कार्य की व्याख्या करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है और महत्वपूर्ण सीखने की क्रिया में रूकावट नहीं पड़ती। कभी-कभी दत्त-कार्य घण्टे के बीच में भी दिया जा सकता है। 
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