CTET 2015 EXAM NOTES


भाषा परिभाषा, प्रकृति एवं मानक स्वरूप


भाषा मानव जीवन की एक सामान्य व सतत् प्रक्रिया है, जिसे मानव को ईश्वर द्वारा दिया अमूल्य उपहार कहा जाता है। भाषा का आरंभ मानव के जन्म के साथ ही हो जाता है। विभिन्न कौशल जैसे बोलना, सुनना, पढ़ना, लिखना, समझना को पूरा करते हुए व्यक्ति भाषा में निपुणता प्राप्त करता है। आरंभ में बालक भूख लगने पर रोता है तो माँ समझ जाती है कि बालक को भूख लगी है। फिर धीरे धीरे परविार के संपर्क में रहकर, आपसी संवादों को सुनकर बालक उनका अनुकरण करता है और इस तरह वह भाषा के क्षेत्र में पारंगत हो जाता है। इस दृष्टि से हम कह सकते हैं कि भाषा अनुकरण की वस्तु है तथा निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।

प्रत्येक परिवार की अपनी बोली होती है, कोई मालवी तो कोई बुंदेली, बघेली, निमाड़ी, गौंडी बोली बोलने वाले हैं। बालक सर्वप्रथम इन्ही के संपर्क में आता है परिणाम स्वरूप वह यह बोली सीखता है जिसे उसकी मातृभाषा कहा जाता है। धीरे-धीरे बालक का संपर्क क्षेत्र बढ़ता है, समाज और शिक्षा के क्षेत्र में उसका परिणाम राष्ट्रभाषा और मानक भाषा से होता है। चाहे वह किसी भी विषय का शिक्षार्थी रहे भाषा सदैव उसके मूल में रहती है। अतः उसका भाषायी पक्ष सुदृढ़ और मजबूत होना अति आवश्यक है। इस संपूर्ण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका भाषा षिक्षक की होती है भाषा शिक्षक कैसा होना चाहिए, बालक के जीवन मे उसकी क्या भूमिका है यह भी जानना अति आवश्यक है।

भाषा परिभाषा, प्रकृति एवं मानक स्वरूप,


उद्देश्य -

भाषा परिभाषा, प्रकृति एवं मानक स्वरूप


भाषा की परिभाषाएँ -

भारतीय एव  पाश्चात्य विद्वानो ने भाषा की विभिन्न परिभाषाएँ दी है।  कुछ प्रमुख परिभाषाएँ निम्नानसु ार है-
1. ‘जो वाणी वर्णों से व्यक्त होती है उसे भाषा कहते है। ’’ - महर्षि पंतजलि
2. ‘‘भाषा वह साधन है जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचार दूसरों पर भलीप्रकार प्रगट कर सकता है और दूसरों के विचार आप स्पष्टतया समझ सकते हैं।’’ - कामताप्रसाद गुरू

पाश्चात्य विद्वानों के अनुसार-
‘‘विचार आत्मा की मूक अथवा अध्वन्यात्मक बात चीत है, जो ध्वन्यात्मक बनकर होठों पर प्रकट होते ही भाषा कहलाती है।’’-प्लेटो 
‘‘ध्वन्यात्मक शब्दों द्वारा विचारों की अभिव्यक्ति का नाम भाषा है।’स्वीट

भाषा की प्रकृति:-



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