CTET 2015 Exam Notes : Child Development and Pedagogy (CDP) in Hindi Medium


बच्चो में संज्ञान  

संज्ञानात्मक विकास का अर्थ- संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं के अन्तर्गत बच्चे का चिंतन, बुद्धि  तथा भाषा में परिवर्तन आता है। इन तीनों परिवर्तनों में संवेदन, प्रत्यक्षीकरण, प्रतिमा-धारण , समस्या-समाधन, चिन्तन, प्रक्रिया, तर्क-शकित जैसी महत्त्वपूर्ण प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं। संज्ञानात्मक विकास प्रक्रियाएँ ही विकासमान बालक को कविताएँ याद करने, गणित की समस्या को हल करने के तरीके के बारे में सोचने व निर्णय लेने, कोर्इ अच्छी व सृजनात्मक रणनीति बनाने व क्रमागत अर्थपूर्ण वाक्य बनाने जैसे कार्यो हेतु योग्य बनाती हैं।
इस प्रकार संज्ञानात्मक विकास से तात्पर्य बालकों में संवेदी सूचनाओं को ग्रहण करके उस पर चिन्तन करने तथा क्रमिक रूप से उसे इस लायक बना देने से होता है जिसका प्रयोग विभिन्न परिसिथतियों में करके वे तरह-तरह की समस्याओं का समाधन आसानी से कर सकते हैं।संज्ञान का अर्थ जानना और जानना ज्ञान का अभिन्न अंग है। इसलिए शैक्षणिक प्रक्रियाओ में अधिगम मुख्य केंद्र संज्ञानात्मक क्षेत्र होता है


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ब्लूम के वर्गीकरण का संज्ञानात्मक क्षेत्र 


संज्ञानात्मक डोमेन (ब्लूम,1956) में ज्ञान तथा बौद्धिक कौशलों का विकास शामिल है। इसमें विशेष तथ्यों का पुनर्स्मरण या पहचान, प्रक्रियागत स्वरूप एवं परिकल्पनाएं शामिल हैं जो बौद्धिक क्षमताओं तथा कौशलों के विकास में मदद करती हैं। कुल छः मुख्य श्रेणियां हैं, जो सरलतम से आरम्भ होकर सबसे जटिल तक के क्रम में नीचे सूचीबद्ध हैं। इन श्रेणियों को कठिनाइयों की कोटियों के रूप में सोचा जा सकता है। यानि, इसके पहले कि दूसरा सीखा जाए, पहले पर महारथ हासिल करनी होगी।


पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत

पियाजे के अनुसार बच्चा अपने वातावरण के साथ अन्तक्र्रिया के परिणामस्वरूप ही सीखता है। संज्ञानात्मक विकास से तात्पर्य चिंतन में गुणात्मक  परिवर्तन से है तथा यह परिवर्तन पहले से उपसिथत संज्ञानात्मक संरचनाओं में अनुकूलन द्वारा होता है। यह परिवर्तन अपरिहार्य व अपरिवर्तनीय तथा जैव-निर्धरित होता है।

संक्षेप में पियाजे के अनुसार बालकों में वास्तविकता के स्वरूप में चिंतन करने, उसकी खोज करने, उसके बारे में समझ बनाने तथा उनके बारे में सूचनाएँ एकत्रित करने की क्षमता, बालक के परिपक्वता स्तर तथा बालक के अनुभवों की पारस्परिक अन्त: क्रिया द्वारा निर्धारित  होती है।बालक अपने विश्व की ज्ञान रचना में 'स्कीमा का प्रयोग करता है। 

बच्चो में संवेग 

संवेग का विकास-


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