CTET 2015 EXAM NOTES

व्याकरण शिक्षण


मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, विचारों के आदान-प्रदान के लिए कुछ सार्थक ध्वनि-प्रतीकों को अपनाया। ये ध्वनि प्रतीक ही भाषा कहलाए। कालान्तर में भाषाओं के सर्वमान्य रूपों का विश्लेषण कर उनमें कुछ नियम निकाले गए। ये नियम ही भिन्न-भिन्न भाषाओं के अपने व्याकरण के अंग है। यहाँ हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पहले भाषा का विकास हुआ, फिर व्याकरण बना।

व्याकरण ऐसा शास्त्र है जो हमें यह बताता है कि किस वाक्य में कौन सा शब्द कहाँ रहना चाहिए। व्याकरण तो भाषा के सर्वमान्य रूप का संरक्षण करता है, लेकिन भाषा तो फिर भी व्याकरण के नियमों से इधर-उधर हो ही जाती है।

व्याकरण का महत्त्व

छात्रों! यहाँ हमें यह बात समझ लेनी चाहिए कि भाषा परिवर्तनशील है, विकासशील है। व्याकरण उसके इस विकास पर नियंत्रण का कार्य करता है। व्याकरण भाषा को अव्यवस्थित एवं उच्श्रृंखल होने से बचाता है। अतः भाषा के स्वरूप को शुद्ध रखने, उसको विकृतियों से बचाने के लिए व्याकरण की शिक्षा आवश्यक है। व्याकरण भाषा का सहचर है। भाषा रूप भवन की रचना शब्द रूपी ईंट व्याकरण रूपी सीमेंट के समुचित योग से सम्भव है।
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व्याकरण के तत्त्व

किसी भाषा के व्याकरण के तीन मूल तत्त्व होते हैं- वाक्यशब्द ,  अक्षर

व्याकरण के उद्देश्य


व्याकरण की शिक्षण प्रणाली


व्याकरण-शिक्षण को रुचिकर बनाने के उपाय


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