CTET 2015 EXAM NOTES


हिन्दी शिक्षण प्रविधियाँ

भाषा शिक्षण  अन्य विषयों के शिक्षण से भिन्न है। अतः इसके शिक्षण  की प्रविधियाँ भी परपंरागत शिक्षण  कुछ भिन्न है इनमें कुछ शिक्षक प्रधान है तो कुछ बाल प्रधान है। शिक्षा के क्षेत्र में हुए अनेक नवीन अन्वेषणों और प्रयोगों के कारण बालकेन्द्रित शिक्षा का विचार प्रबल हो गया है। बालक की रूचिक्षमता और मानसिक स्तर के आधार पर अलग-2 शिक्षण पद्धतियों का प्रयोग किया जाता है।

इनमें प्रमुख प्रविधियाँ निम्नानुसार है।
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ध्वनि साम्य विधि - 

हिन्दी शिक्षण  में ध्वनि साम्य प्रविधि का उपयोग सुनने और बोलने की योग्यताओं और कौशल के विकास के लिए किया जाता है। बच्चों में अनुकरण की प्रवृत्ति होती है वे जैसा सुनते है वैसा बोलते है ध्वनि साम्य प्रविधि मेंअनुकरण और अभ्यास दोनों ही क्रियाओं के माध्यम से सुनने और बोलने की योग्यता को निखरा जाता हैवे स्पष्टोच्चारउचित लयस्वराधातबलाघात के साथ बोलने का अभ्यास तथा अर्थ विभेद करने के समर्थ हो जातेहै।जैसे-जलकलपल। रतनजतनवतन खूनऊन मालीजालीकाली भैयागैयामैगा चंदनअंचलचंचल/फक्कड़लक्कड़।

ध्वनि साम्य विधि से सुनने  बोलने की योग्यता-


सुनो और बोलो प्रविधि- 


सुनों और बोलो प्रविधि का प्रयोग-


देखो और कहो प्रविध-

 इसमें बालक दृष्य और श्रवण दोनों ही इंद्रियों का उपयोग करते हुए भाषा सीखते हैं। इसमें देखकर बोलने के साथ बालक पढ़ने में भी उनके कौशल को विकसित करता है। इस विधि द्वारा ध्वनि लिपि चिन्हों को पहचानना और उनका उच्चारण करनासमझनाअर्थग्रहण करना बच्चों के लिए संभव होगा। यह प्रविधि मौखिक कौशल के लिए बहुत उपयोगी साबित होती है।

अनुकरण प्रविधि

इस विधि का प्रयोग प्रायः भाषण और वाचन कौशल के विकास के लिए किया जाता है। इसके साथ लेखन कौशल हेतु भी यह प्रविधि प्रयोग में लाई जाती है। यथा-

श्रवण  भाषण कौशलशिक्षक बोलते हैं बालक सुनते हैं। शिक्षक का वार्तालापकहानी कथनघटना वर्णनअनुभव कथनदृष्यवर्णनचित्र वर्णन काव्यपाठव्याख्यानप्रश्नोत्तर आदि के आधार पर वे अनुकरण कर अपना भाषण कौशल विकसित करते हैं। इसके साथ ही इस प्रविधि से बालक मानक भाषा का प्रयोगषिष्टाचारानुसार भाषा का प्रयोगभाषण में स्पष्टतागतिषीलताक्रमबद्धताप्रभावोत्पादकतामुहावरेदार भाषा का प्रयोगषिष्टाचार युक्तसरल एवं स्वाभाविक भाषा का प्रयोग करना सीखते हैं।


इकाई शिक्षण  - 

प्रश्न प्रविधि


अभ्यास विधि-


आगमन और निगमन विधि

अध्यापन के दौरान शिक्षक को यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रत्येक बालक का मानसिक स्तर एक सा नहीं होता। कुछ छात्र विषयवस्तु के साधारण से साधारण नियमों को सीखने में असमर्थ और असहाय महसूस करते हैं अतः ऐसे मंे नियम बताए बिना ही छात्रों को भाषा शिक्षण  कराया जाता है। यथा निम्न माध्यमिक स्तर पर बच्चे का भाषा पर पर्याप्त अधिकार हो जाता है जिससे वे भाषा के सरल नियमों को सीखने की स्थिति में  जाता है किन्तु इतना नहीं कि संज्ञासर्वनामविषेषण आदि के भेदों और उप भेदों को समझ सके यह भेद माध्यमिक (उच्चकक्षाओं के लिए उपेयागी रहता है। 

भाषा शिक्षण  में चित्रों का उपयोग-

चित्रविधि के गुण-

1. यह पद्धति चित्रात्मक होने के कारण बच्चों के लिए तो आकर्षक है ही षिक्षकों के लिए भी अधिक सुविधा जनक है।
2. चित्र के द्वारा दिया गया शिक्षण  बच्चों पर गहराई से प्रभाव अंकित करता है।
3. यह विधि मनोवैज्ञानिक है जिसमें पहले दृष्यबिंब फिर विचारबिंब तत्पष्चात भावबिंब बनाते है।
4. बड़ी कक्षाओं मंें भी यह विधि प्रयुक्त होती है यथा ध्वनि यंत्र पढ़ाते समय मुख विवर के बारे में जानकारी देने हेतु काफी मददगार साबित होंगे।
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