CTET 2015 Exam Notes : Child Development and Pedagogy (CDP) in Hindi Medium


अधिगम का अर्थ:-


सीखना या अधिगम एक व्यापक सतत् एवं जीवन पर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है। मनुष्य जन्म के उपरांत ही सीखना प्रारंभ कर देता है और जीवन भर कुछ न कुछ सीखता रहता है। धीरे-धीरे वह अपने को वातावरण से समायोजित करने का प्रयत्न करता है। इस समायोजन के दौरान वह अपने अनुभवों से अधिक लाभ उठाने का प्रयास करता है। इस प्रक्रिया को मनोविज्ञान में सीखना कहते हैं। जिस व्यक्ति मंे सीखने की जितनी अधिक शक्ति होती है, उतना ही उसके जीवन का विकास होता है। सीखने की प्रक्रिया में व्यक्ति अनेक क्रियाएंे एवं उपक्रियाऐं करता है। अतः सीखना किसी स्थिति के प्रति सक्रिय प्रतिक्रिया है।

बालकोें मेें अधिगम की वैैकल्पिक संकल्पना


अधिगम की आधुनिक वैकल्पिक अवधारणाओं को निम्नलिखित दो मुख्य श्रेणिओ में बांटा जा सकता है:-

व्यवहारवादी साहचर्य सिद्धांत: विभिन्न उद्दीपनो के प्रति सिखने वाले की विशेष अनुक्रिया होती है । इन उद्दीपनो तथा अनुक्रिया के साहचर्य से उसके व्यवहार में जो परिवर्तन आते है, उनकी व्याख्या करना ही इस सिद्धांत का उद्देश्य होता है । इस प्रकार के सिधान्तो के अंतर्गत थॉर्नडाइक , पेवलोव और स्किनर के अधिगम सिद्धांत आते है।

ज्ञानात्मक व् क्षेत्र संगठनात्मक सिद्धांत: अधिगम का यह सिद्धांत सिखने की प्रक्रिया में उद्देश्य अंतर्दृष्टि और सूझबूझ के महत्व को प्रदर्शित करता है । इस प्रकार के सिधान्तो के अंतर्गत वर्देमीर, कोहलर एवं लेविन के अधिगम सिद्धांत आते है।

  1. उद्दीपन-अनुुिक्रिया का सिद्धान्त (Thorndike’s Stimulus Response Theory)
  2. पावलव का शास्त्रीय अनुबंधन अनुकूलित-अनुुिक्रिया का सिद्धातं (Pavlov Theory of conditioned Response)
  3. स्किनर का सक्रिय अनुबन्धन (Instrumental conditioning) सिद्धान्त
  4. अन्र्तदृृिष्टि का सिद्धान्त
  5. निर्मितिवाद (Constructivism)
  6. अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत
  7. हल का व्यवस्थित व्यवहार सिद्धांत


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