CTET 2015 Exam Notes : Child Development and Pedagogy (CDP) in Hindi Medium


बच्चे कैसे सोचते है?

सोचना अथवा चिंतन एक उच्च प्रकार की ज्ञानात्मक प्रक्रिया है, जो ज्ञान को संगठित करने में मुख्य भूमिका निभाती है।  चिंतन अवधारणाओं, संकल्पनाओं, निर्णयों तथा सिद्धांतो आदि में वस्तुगत जगत को परावर्तित करने वाली संक्रिया है जो विभिन्न समस्याओं के समाधान से जुड़ी हुई है। चिंतन विशेष रूप से संगठित भूतद्रव्य-मस्तिष्क- की उच्चतम उपज है।

इसी प्रकार बालक समस्याओ, वस्तूओं , दृश्य-परिदृश्यों आदि के विषय में चिंतन करता रहता है। यह चिंतन अनुभवजन्य होता है। बालक अपनी स्वभाविक प्रवृत्ति के अनुसार वस्तुओं को छूकर या देखकर उनके बारे में अनुभव प्राप्त करता है। धीरे-धीरे बालक में प्रत्यय निर्माण होने लगता है और किशोरावस्था तक अमूर्त चिंतन करने लगता है। बालको में  चिंतन की प्रक्रिया का विकास एक निश्चित क्रम में होता है उसका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:-

  1. प्रतीयक्षीकरण के आधार पर सोचना 
  2. कल्पना के आधार पर सोचना 
  3. प्रत्ययों के आधार पर सोचना 
  4. तर्क के आधार पर सोचना 
  5. अनुभव के आधार पर सोचना 
  6. रूचि और जिज्ञासा के आधार पर सोचना 
  7. अनुकरण के आधार पर सोचना 

चिंतन के बारे में विस्तार  जानने के लिए चिंतन की सामान्य विशेषताएं व मुख्य विशिष्ट नियम अवश्य पढ़े ।

बच्चे कैसे सीखते है?


बच्चो में सोचना एवं अधिगम , बच्चे कैसे सोचते है?, बच्चे कैसे सीखते है?, सीखने के नियम, बालक विद्यालय प्रदर्शन मेें सफलता प्राप्त करनेे मेें कैैसेे औैर क्योें ‘असफल’ होेतेे हैैं।, CTET Exam 2015 Notes Hindi,  बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र, CDP Hindi Notes, सी टी ई टी नोट्स

सीखना या अधिगम का अर्थ:-

सीखने के नियम:-


ई.एल. थार्नडाइक अमेरिका का प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक हुआ है जिसने सीखने के कुछ नियमों की खोज की जिन्हें निम्नलिखित दो भागों में विभाजित किया गया है -

(अ) मुख्य नियम

(ब) गौण नियम

बालक विद्यालय प्रदर्शन मेें सफलता प्राप्त करनेे मेें कैैसेे औैर क्योें असफल’ होेतेे हैैं।



नोट: आपको हमारी पोस्ट कैसी लगी, कृपया कमेंट करके ज़रूर बताए ।

Post a Comment Blogger

 
Top