CTET 2015 EXAM NOTES


मानक हिंदी भाषा उपयोगिता और महत्व

भारत एक बहुभाषी देश है जहां न केवल कई भाषाएं बोली जाती है वरन एक ही भाषाओं की भी कई उपभाषाएं भी प्रचलन में है। उसी प्रकार हिन्दी के भी अनेक रूप प्रचलन में है जैसे - भोजपुरी हिन्दी, बघेली हिन्दी, अवधी, हिन्दी, निमाड़ी, मालवी आदि। ऐसे में यदि कोई अहिन्दी भाषी व्यक्ति हिन्दी सीखना चाहे तो उसके समक्ष यह समस्या आती है कि वह कौन सी हिन्दी सीखें?

ताकि व्यवहार में उसका काम आसान हो सके उसी के साथ, सरकारी कामकाज, आकाशवाणी, दूरदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर समाचार पत्र, महत्वपूर्ण सूचनाओं का आदान प्रदान फिल्में, साहित्य आदि के लिए भी विकट समस्या उपस्थित होती है कि आखिर कौन सी हिन्दी को अपनाया जाय? जिसके निराकरण का एक मात्र हल है (निवारण) कि हिन्दी के इन विभिन्न रूपों के बीच कोई ऐसा रूप होना चाहिए जो सर्व व्यापक, सर्व मान्य हो, हिन्दी के सभी विद्वानों द्वारा प्रयुक्त, व्याकरण दोषों से मुक्त, अधिकांश लोगों द्वारा समझी, लिखी व पढी़ जाने वाली भाषा हो ताकि ज्यादा से ज्यादा व्यावहारिक रूप में उसका प्रयोग किया जा सक।े वास्तव में शिक्षित वर्ग अपने, सामाजिक, साहित्यिक, व्यावहारिक वैज्ञान तथा प्रषासकीय कार्यों में जिस भाषा का प्रयोग करता है। भाषा मानक भाषा कहलाती है। मानक भाषा अपने राज्य/राष्ट्र का सम्पर्क भाषा भी होती है। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि -

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हिन्दी का सर्वमान्य, सर्वस्वीकृति, सर्वप्रतिष्ठित रूप ही मानक हिंदी भाषा है। विद्वानों ने मानक भाषा के चार प्रमुख तत्व बताएँ हैं:-
1. ऐतिहासिकता - मानक भाषा का गौरवमय इतिहास तथा विपुल साहित्य होना चाहिए।
2. मानकीकरण - भाषा का कोई सुनिश्चित और सुनिर्धारित रूप होना चाहिए।
3. जीवतंता - भाषा साहित्य के साथ साथ विज्ञान, दर्शन आदि क्षेत्रों में प्रयुक्त की गई हो तथा नवाचार में  पूर्ण रूप से सक्षम हो।
4. स्वायतता - भाषा किसी अन्य भाषा पर आश्रित न होकर अपनी स्वतंत्र लिपि, शब्दावली व व्याकरण परखती है।

वर्तमान में मेरठ, सहारनपुर तथा दिल्ली के पास बोली जाने वाली बोली भाषा का परिनिष्ठित रूप है जिसे खड़ी बोली कहा जाता है स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात हिन्दी को मानक भाषा बनाने हेतु काफी प्रयास किया गया और आज हिन्दी का यही रूप प्रचलन में है।

1. राज-काज की भाषा - के रूप में मानक भाषा, बेहद कारगर सिद्ध होती है विभिन्न कार्यालयों, स्कूलों, महाविद्यालयों में यह भाषा संप्रेषण की दृष्टि से काफी सुविधा जनक होती है।

2. ज्ञान-विज्ञान की भाषा - धर्म, दर्शन और विज्ञान आदि के क्षेत्र में मानक भाषा का प्रयोग, भाषा की उपयोगिता को बढ़ाता है।

3. साहित्य व संस्कृति की भाषा - साहित्य लेखन तथा विभिन्न औपचारिक अवसरों पर इसी भाषा पर प्रयोग किया जाता है।

4. मनोरंजन के क्षेत्र में - आकाशवाणी, दूरदर्शन, सिनेमा, चलचित्र समाचारपत्र व पत्रिकाओं में इसी भाषा का प्रयोग किया जाता है।

5. शिक्षा के क्षेत्र में उपयोगिता - विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में अध्यापन, परियोजना कार्य तथा शोध और अनुसंधान हेतु इस भाषा का प्रयोग किया जाता है।

6. अनुवाद की भाषा के रूप में - अच्छे साहित्य के अनुवाद हेतु हिन्दी मानक भाषा का प्रयोग किया जाता है ताकि अधिक से भाषा के उत्कृष्ट साहित्य को जन जन तक पहुंचाया जा सके।

7. कानून व चिकित्सा तकनीकी के क्षेत्र में - प्रत्येक क्षेत्र की अपनी शब्दावली होती है जैसे विज्ञान, कानून, तकनीकी आदि इन शब्दावलियों के मानक रूप तैयार किए जाते हैं, जिससे इस भाषा को बोधगम्य बनाया जा सकता है।

8. सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक - मानक होने के कारण सभी इसका प्रयोग करते हैं।

9. एकता के सूत्र में बाँधती हैं - राजकाज, शिक्षा, संपर्क की एक मानक भाषा होने से ये लोगों को एक सूत्र में बांधती है।

10. शिष्ट समाज की भाषा - क्षेत्र से बाहर प्रयुक्त होने वाली भाषा में मानक भाषा का अपना महत्व है। इसके माध्यम से पूरे जनसमुदाय से संपर्क स्थापित हो सकता है।

महत्व - मानक हिन्दी भाषा में मानक शब्दों का प्रयोग होने तथा व्याकरण सम्मत भाषा होने से यह भाषा उच्चारण व लेखन दोनों में ही अशुद्धियों से मुक्त होती हैं तथा समस्त प्रतिष्ठित व औपचारिक अवसरों पर इसका प्रयोग किया जाता है, शासन की अधिकृत भाषा होने से संपूर्ण प्रशासन प्रक्रिया में इसी भाषा का प्रयोग किया जाता है। इसका गौरवशाली इतिहास होने से इसमें विपुल साहित्य उपलब्ध होता है। भाषा का स्वरूप सुनिश्चित और सुनिर्धारित होने से इस भाषा को बोलन,े सीखने व समझने में काफी सुविधा होती है। मानक भाषा का एक गुण है कि इसमें गतिशीलता बनी रहती हैं । शिक्षा कानून, विज्ञान, चिकित्सा, अनुसंध्ाान के क्षेत्र में मानक भाषा का प्रयोग न केवल प्रक्रिया को सरस बनाता है वरन उसे सीखने, में भी सहायक होता है। आज विभिन्न भाषाओ ं के श्रेष्ठ साहित्य का अनुवाद मानक भाषा का उपलब्ध कराया जा रहा ह,ै ताकि अधिक से अधिक लोग उस साहित्य से अवगत हो सकें। इसके साथ ही अपनी स्वतंत्र लिपि व शब्दावली तथा व्याकरण होने से इसमें संदेह की संभावना भी नहीं रहती। इस दृष्टि से हम कह सकते हैं कि -

किसी भी क्षेत्र प्रदेश में शिक्षा, तकनीकी, कानून, औपचारिक स्थितियों, लेखन, प्रशासन, संबंधी गतिविधियों तथा शिष्ट समाज में प्रयुक्त करने हेतु मानक भाषा का महत्वपूर्ण स्थान हैं। यह न केवल सुसंस्कृत व साधुभाषा है बल्कि हमारी संप्रेषण क्षमता को भी बढ़ाती है।


हिन्दी का मानक स्वरूप- 

मानक हिन्दी भाषा संतात्पर्य हिन्दी भाषा के उस स्थिर रूप से हैं जो उस पूरे क्षेत्र में शब्दावली तथा व्याकरण की दृष्टि से समझन ै योग्य तथा सभी लोगो ं द्वारा मान्य हो, बोधगम्य हो। अन्य भाषाओं की अपेक्षा  प्रतिष्ठित हो। व्याकरण सम्मत हो।


हिन्दी ही आधुनिक मानक शैली का विकास हिन्दी भाषा की एक बोली, जिसका नाम खड़ी बोली है, के आधार पर हुआ है। हिन्दी बोली, ब्रज, अवधी, निमाड़ी आदि क्षेत्रों के लोग परस्पर व्यवहार में अपनी इन्ही क्षेत्रीय बोलियों का उपयोग करते हैं मगर औपचारिक अवसरों पर मानक हिन्दी का ही प्रयोग करते हैं। उदाहरण स्वरूप मैिथलीशरण गुप्त चिरगाँव के थ े वे घर में बुंदेलखण्डी बोलते थे उसी प्रकार हजारी प्रसाद द्विवेदी भोजपुर के थे घर में भोजपुरी बोलते थे किन्तु ये सभी व्यक्ति जब साहित्य लिखते थे तो मानक भाषा का व्यवहार करते थे। अतः हम कह सकते हैं कि मानक भाषा अपनी भाषा का एक विशिष्ट स्तर है।

मानक स्वरूप -

हिन्दी ‘मानक’ शब्द से तात्पर्य है पैमाना जिसकी उत्पत्ति अंग्रेजी के स्टैंडर्ड शब्द के स्थान पर हुई है। रामचंद्र वर्मा ने 1949 में सर्वप्रथम अपने प्रकाशित ‘प्रामाणिक हिन्दी कोष’ में मानक शब्द को प्रयुक्त किया। इसका अर्थ उन्होंने ‘निश्चित या स्थिर किया हुआ सर्वमान्य ‘मान या माप’ बताया जिसके अनुसार किसी भी योग्यता, श्रेष्ठता, गुण आदि का अनुमान या कल्पना की जाती है।’

तब यही शब्द भाषा के क्षेत्र में ‘स्टेंडर्ड लैंग्वेज’ (मानक भाषा) के रूप में प्रयुक्त हुआ। हिन्दी आज हमारी राजभाषा है और हिन्दी के कई रूप यहां प्रचलन में है। इससे समस्या आती है कि बुंदेली हिन्दी, बघेली हिन्दी, अवधी हिन्दी, हरियाणवी हिन्दी आदि ऐसे मे  यदि कोई व्यक्ति हिन्दी सीखना चाहे अथवा अपना साहित्य हिन्दी में लिखना चाहे एक ऐसी हिन्दी में जिसे सभी पढ सके, समाचार पत्र, दूरदर्शन, आकाशवाणी, आदि तब सभी के समक्ष यह प्रश्न मुँह बाए खड़ा होगा कि कौन सी हिन्दी? वे अपनाए ताकि उनका श्रम सार्थक हो। इस कारण ही मानक हिंदी भाषा को स्थापित किया गया।

मानक भाषा की उपयोगिता -

मानक हिन्दी भाषा ही देश की अधिकृत भाषा है जो विभिन्न स्थानों पर भी एक सुनिश्चित व सुनिर्धारित रूप में मान्य होती है किन्तु अपनी जीवन्तता बनाए रखने के लिए इसमें गतिशीलता भी बनी रहती है। भारत एक हिन्दी भाषी देश होने से यहाँ हिन्दी के कई रूप प्रचलन में है किन्तु सभी की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भाषा का हिन्दी मानक रूप तैयार किया गया है । 

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