CTET 2015 Exam Notes : Teaching of Mathematics in Hindi Medium


गणित की प्रकृति 



गणित का सीधा सम्बन्ध नाप तौल है गणित के सिद्धान्तों के ज्ञान के बिना हम किसी भी क्षेत्र की नाप तौल कर सकते है अध्यापक और गणित प्रेमी इसके प्रकृति को बिना समझे इसकी प्रशसंा किया करते है बर्टेªण्ड रसल ने कहा था कि ‘‘यद्यपि गणित तर्कशास्त्र की वह शाखा नही है फिर भी यह तर्कपूर्ण भाषा है और इसलियें इसे सर्व मान्य बना दिया कि इसके तथ्य तर्क पर आधारित है।’’

गणित की प्रत्येक शाखा सिद्धियों से प्रारम्भ होती है स्वंय सिद्धियों के लिये किसी भी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है ये स्वयं होते है ये सिद्धियां इसका अर्थ है कि संख्याओं के क्रम को बदलनें पर योग की क्रिया में कोई अन्तर नही पडता है।

गणित का ज्ञान विश्व में समान रूप का होता है तथा उसका सत्यापना किसी समय तथा किसी भी स्थान पर किया जा सकता है गणित की समस्याओं के उत्तर सदैव स्थिर रहते है उनमें परिवर्तन नही किया जा सकता है। वे विवादास्पद नहीं होते है जैसा कि अन्य सामाजिक विषयों में होता है दर्शन तथा सामाजिक विषयों में भिन्न भिन्न व्यक्तियों के विचार भिन्न भिन्न हो सकता है गणित विषय की प्रकृति का उल्लेख निम्न प्रकार से किया जा सकता है।

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प्रत्येक विषय में जो पाठयक्रम तय किया जाता है उसका एक दिशिष्ट उद्देश्य होता है इसके अलावा उस विषय की उसकी प्रकृृति भी होती है प्रकृति के आधार पर उस विषय की भिन्नता इसके विषय में की जाती है गणित की प्रकृति का उल्लेख है।
1. गणित में अमूर्त प्रत्ययों की व्याख्या की जाती है व्याख्या के आधार पर उनमें विचार दृढ बनते है, और उन्हें मूल रूप में परिवर्तन किया जा सकता है जैसे ठोसों के आयतन ज्ञात करने के लिये जो सूत्र प्रयोग किये जाते है वह अमूर्त होते है, लेकिन सूत्रों का प्रयोग करने जब वह व्यावहारिक दृष्टि से ठोसों के आयतन की गणना करते है तो वे स्थूल रूप में ही बदल जाते है।

2. गणित की अपनी एक भाषा होती है जिसके माध्यम से पद, प्रत्यय चिन्ह् सूत्र और सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया जाता है उन्हें सकंेत और लिपि के माध्यम से जाना जा सकता है।

3. गणित में सामान्यनुमान का क्षेत्र व्यापक है उसमें आगमन और निगमन विधि भी सन्निहित होती है वास्त में बीजगणित अंकगणित का ही सामान्यनुमानीकरण है।

4. प्रत्येक ज्ञान गणित द्वारा ही स्पष्ट किया जा सकता है, इसके निश्चित उत्तर होते है अनमें किसी प्रकार शक सन्देह नही होता है।

5. गणित विषय का ज्ञान का आधार हमारी ज्ञानेन्द्रिंयां होती है जिन पर विश्वास किया जा सकता है क्योंकि इस ज्ञान का एक निश्चित आधार होताा है।

6. गणित के ज्ञान का प्रयोग अन्य विषयों में विस्तार से किया जाता है भौतिक विज्ञान (physics) रसायनिक विज्ञान (Chemistry) भूगर्भ विज्ञान (Chemistry) और सांख्यिकी (Statistics) तो गणित के अंग हैं इसके अलावा भूगोल, वाणिज्य व जीव विज्ञान यहां तक कि प्रत्येक विषय गणित का सहारा लेता है यहां तक कि हिन्दी, अंग्रेजी जैसे साहित्यिक विषय भी छन्दे। की मात्रा गिनने में गणित का ही सहारा लेते है।

7. संख्यायें स्थान मापन आदि गणित का आधार है इसमें वस्तुओं सम्बन्ध तथा संख्यात्मक निष्कर्ष निकाले जाते है।

8. गणित के माध्यम से जो निष्कर्ष निकाले जाते है तथा उनके आधार पर भविष्यवाणी किये जाते है वे हमारे उद्देश्यों को पूर करने में समर्थ है।

9. गणित जगत जन्य विषय है जिसकी मान्यतायें दुनियां के प्रत्येक कोने में सर्वामान्य है यह ज्ञान समय स्थान के स्थान परिवर्तित नही होता है गणित का ज्ञान ठीम स्पष्ट, तार्किक तथा क्रमबद्ध रूप में होता है। उसे एक बार समझानें पर आसानी से भुलाया नही जा सकता हैं गणित के पद क्रमबद्ध ही रखे जा सकते है तारतम्य बदलने पर पूरा अर्थ तथा विषय ज्ञान ही नश्ट व भ्रमित हो जायेगा। 

इस प्रकार हम गणित की प्रकृति के बारे में वर्णन कर सकते है कि गणित पूर्णतयों नियमें, सिद्धान्तों तथा सूत्रों से बधां हुआ है और हमारी सम्पूर्ण सभ्यता का आधार है अतः वर्तमान में गणित की प्रगति तथा इसका अधिकतम प्रयोग हमारी सभ्यता का उन्नति का परिचारक है।

गणित के मूल आधार

ज्ञात है कि गिनती करना गणितीय चार मूलभूत क्रियायें (जोड, बाकी गुणा, भाग) व अन्य गणितीय संक्रियायें दैनिक जीवन में अत्यधीक उपयोगी है। इन सभी का आधार गणित ही है हम सबके जीवन का प्रत्येक क्षण और सम्बन्धित क्रियायें माप तोल और गणना पर आधारित है। जिनमें हमें कदम कदम पर गणित की सहायता लेनी होती हैं विश्व का समस्त व्यापार, तिजारत और लेन देन गणित पर ही निर्भर है। गणित हमारी आधुनिक सभ्यता का भी मूल आधार है यहां गणित के कार्यक्षेत्र और मूल आधार होने सम्बन्धी विचार अनेक शिक्षाविदों द्वारा प्रस्तुत किये गये है।

1. हाॅग बेन के अनुसार ‘‘गणित सभ्यता व संस्कृति का दर्पण है।’’
2. लाॅक के अनुसार - ‘‘गणित वह मार्ग है जिसके द्वारा बच्चों के मन या मस्तिष्क में तर्क करने की आदत स्थापित होती है।’’
3. नेपोलियन के शब्दों में - ‘‘गणित की उन्नति तथा वृद्धि देश की सम्पन्नता से सम्बन्धित है।’’
4. जे.डब्ल्यू.ए. यंग के अनुसार - ‘‘यदि विज्ञान का आधार स्तम्भ गणित हटा दिया जावें तो सम्पर्ण भौतिक सभ्यता निः सन्देह नष्ट हो जायेगी।’’
5. रोजन बैंकन के अनुसार - ‘‘गणित की शिक्षा मुख्य रूप एवं कुंजी है।’’
6. प्रोफेसर शूल्टने के अनुसार - ‘‘गणित की शिक्षा मुख्य रूप से मानसिक शक्तियों को विकसित करने के लिये दी जाती है। गणित के तथ्यों का ज्ञान देना इसके बाद ही आता है।’’

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