CTET 2015 EXAM NOTES


पठन/वाचन कौशल


पठन/वाचन कौशल की भूमिका

भाषा शब्द से ही ज्ञात होता है कि भाषा का मूल रूप उच्चरित रूप है। इसका दृष्टिकोण प्रतीक लिपिबद्ध होता है। मुद्रित रूप लिपिबद्ध रूप का प्रतिनिधि है। जब हम बच्चे को पढ़ाना आरम्भ करते हैं तो अक्षरों के प्रत्यय हमारे मस्तिष्क के कक्ष भाग में क्रमबद्ध होकर एक तस्वीर बनाते हैं, और हम उसे उच्चरित करते हैं। यह क्रिया जिसमें शब्दों के साथ अर्थ ध्वनि भी निहित है। वाचन कहलाती है।

पठन कौशल का अर्थ

कैथरीन ओकानर के मतानुसार- “वाचन/पठन वह जटिल अधिगम प्रक्रिया है, जिसमें दृश्य, श्रव्यों सर्किटों का मस्तिष्क के अधिगम केन्द्र से सम्बन्ध निहित है।”
लिखित भाषा के ध्वन्यात्मक पाठ को मौखिक पठन कहते हैं। पर बिना अर्थ ग्रहण किए गए पढ़ने को पठन नहीं कहा जा सकता। पठन की क्रिया में अर्थ ग्रहण करना आवश्यक होता है। अर्थ ग्रहण किस सीमा तक होता है, यह तो पठनकर्ता के ज्ञान एवं कौशल पर निर्भर है।

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वाचन/पठन का महत्त्व

वाचन/पाठन कौशल के उद्देश्य


वाचन/पाठन के आधार


पाठन/वाचन के गुण या विशेषताएं

सुन्दर वाचन में निम्न गुणों का होना जरूरी है-
1. प्रत्येक अक्षर को शुद्ध तथा स्पष्ट उच्चरित करना
2. वाचन में सुन्दरता के साथ प्रवाह बनाये रखना
3. मधुरता, प्रभावोत्पादकता तथा चमत्कारपूर्ण ढंग से आरोह-अवरोह के साथ वाचन होना चाहिए।
4. प्रत्येक शब्द को अन्य शब्दों से अलग करके उचित बल तथा विराम के साथ पढ़ना।

वाचन/पठन कौशल की शिक्षण विधियाँ


अर्थ ग्रहण पर आधारित विधियां


पाठन/वाचन सम्बन्धी त्राुटियां


पाठन/वाचन सम्बन्धी दोषों का निवारण


नोट: आपको हमारी पोस्ट कैसी लगी, कृपया कमेंट करके ज़रूर बताए । 

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