CTET 2015 Exam Notes : Teaching of Mathematics in Hindi Medium


गणित का पाठयक्रम 


पाठयक्रम को अग्रेंजी में Curriculum कहते है, जिसका अर्थ है - दौड़ का मैदान। शिक्षा में इसका अर्थ छात्रों को उस मैदान से है जिसकों पार कर वह अपने लक्ष्य की प्राप्ति करता है। वास्तव में देखा जाए तो पाठयक्रम पाठय क्रमवस्तु का सुव्यस्थित रूप है इसकी परिभाषा भिन्न भिन्न विद्धानों ने अपनी तरह से कि जैसे 

1. कनिद्यम (Conninghan)के अनुसार - ‘‘पाठ्य शिक्षक के हाथ में एक साधन है जिससे वह अपने शिक्षार्थी को अपने उद्देश्य के अनुसार अपने शिक्षालय में चित्रित कर सके।

2. जान डिवी (John Dewey) के अनुसार ‘‘इसके अनुसार सीखने का विषय था पाठयक्रम पदार्थो विचारों और सिद्धोन्तों का चित्रण है जो उद्देश्पूर्ण क्रियान्वेषण के साधन थाबाधा के रूप में आ जाते है।

3. फ्राबोल के अनुसार ‘‘पाठयक्रम सम्पूर्ण मानव जाति के ज्ञान एवं अनुभव के प्रतिरूप होना चहिये’’

4. किलपेट्रिक के अनुसार पाठयक्रम छात्रों का उस सीमा तक सम्पूर्ण जीवन है जीस सीमा तक विद्यालय इस अच्छा या बुरा बनाने का उत्तरदायित्व स्वीकार करता है।’’

5. बेन्ट तथा क्रोनबर्ग के अनुसार ‘‘संक्षेप में पाठयवस्तु पाठयवस्तु का ही सुव्यस्थित रूप है जिसका निर्माण छात्रों के आवश्यकता कि पूर्ति के लिये होता है।

6. बाल्टर सी के अनुसार ‘‘ पाठयक्रम में वे सभी अनुभव निहित होते है जिसका छात्र विद्यालय के निर्देशन में प्राप्त करते है इसमें कक्षा कक्ष की क्रियाओं तथा उनके बाहर के सम्मत कार्य एवं खेल सम्मिलित किऐ जाते है।

अच्छे गणित के पाठयक्रम की परख के मापदण्ड

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गणित पाठयक्रम निर्माण के सिद्धान्त


किसी भी विषय के पाठयक्रम निर्माण में सिद्धान्तों को उस विषय की विषय वस्तु छात्रों की आयु और मानसिक स्तर के आधार पर निर्धारित किया जाता है वस्तुतः पाठयवस्तु वह साधन है जिसके माध्यम से छात्रों को षिक्षा के मिक्ष्यों की प्राप्ति कराने का प्रयास किया जाता है:


1. प्राथमिक स्तर (पूर्ण प्राथमिक कक्षा 1 से 5 तक) तथा (उच्च प्राथमिक कक्षा 6 7 8 तक)
2. माध्यमिक स्तर कीशिक्षा
3. उच्च शिक्षा
इन तीनों स्तरों के छात्रों की मनोविज्ञान रूचियां, अभिरूचियों क्षमता तथा आयु भिन्न होती है।

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