CTET 2015 EXAM NOTES


राष्ट्रभाषा की आवश्यकता एवं महत्व-

प्रत्येक राष्ट्र की अपनी निश्चित भाषा होती है, जो उसकी सबसे प्रमुख पहचान होती है संपूर्ण राष्ट्र उस भाषा, का प्रयोग करता है। संविधान द्वारा उसे मान्यता प्रदान की जाती है इस कारण यह शासन प्रशासन के क्षेत्र में प्रयुक्त की जाती हैं। बिना राष्ट्र भाषा के राष्ट्र में कोई भी कार्य सुनियोजित रूप से नहीं हो सकता तथा भाषा के क्षेत्र में सदैव अराजकता की स्थिति बनी रहती है। हम कह सकते है कि बिना राष्ट्रभाषा के राष्ट्र के सर्वागीण विकास संभव नहीं है। क्योंकि परस्पर विचार विनिमय, संवाद पत्राचार, आपसी समझ में भाषा ही हमारी मदद करती है।

इसीलिए भारतेन्दु हरिशचन्द्र ने कहा भी है -

‘‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय को शूल।’’

भाषा ही है जो संपूर्ण राष्ट्र को एकता के सूत्र में बाँधकर रखती है। उनमें राष्ट्रीयता का भाव जागृत करती है। अतः राष्ट्र के लिए उसकी अपनी एक निर्धारित व सर्वमान्य भाषा होना अनिवार्य है। यही राष्ट्र की सपर्क भाषा होती है।

महत्व -

प्रत्येक राष्ट्र के कुछ अपने मानक होते हैं, जैसे, राष्ट्रीय पुष्प, राष्ट्रीय, पशु, पक्षी, फल। उसी तरह राष्ट्र की अपनी भाषा भी होती है। यह भाषा राष्ट्रभाषा कहलाती है। डाॅ. द्वारिकाप्रसाद सक्सैना के अनुसार -‘‘जो भाषा किसी राष्ट्र के भिन्न-भिन्न भाषियों के पारस्परिक विचार विनिमय का साधन बनती हुई समूचे राष्ट्र को मानात्मक एकता के सूत्र में बाँधती है, उसे राष्ट्रभाषा कहते हैं।’’
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राष्ट्र के इतिहास साहित्य, संस्कृति, उस राष्ट्र की विज्ञान, चिकित्सा, तकनीकी विकास आदि के क्षेत्र में निहित
उपलब्धियों को संग्रहित करने में राष्ट्रभाषा की महती भूमिका है। राष्ट्र भाषा किसी भी राष्ट्र की एकता को सुदृढ़ बनाने में उपयोगी होती हैं किसी भी प्रांत का व्यक्ति देशके किसी भी कोने में चला जाय उसे अपने विचार विनिमय में किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं होगी क्योंकि उस भाषा को बोलने वाले लोग संपूर्ण देश के विद्यमान रहते हैं। प्रत्येक राष्ट्र की कोई एक भाषा ही राष्ट्र भाषा बनती हैं।

इस दृष्टि से ये देश भर के लोगों को परस्पर जोड़े रहती है। विद्वानों ने कहा भी है की युवा पीढ़ी की भाषा को बिगाड़ दीजिए वह देश अपने आप पतन के गर्त में चला जाएगा। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि राष्ट्र भाषा किसी राष्ट्र  के विकास के लिए क्या मायने रखती है। क्योंकि भाषा का प्रभाव संस्कृति पर और संस्कृति से जुड़ा होता है। समाज और राष्ट्र भाषा के प्रभावित होने पर ये सभी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते।

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