CTET 2015 EXAM NOTES IN HINDI MEDIUM


स्रोत विधि : SOURCE METHOD

सामुदायिक स्रोतों का प्रयोग 

व्यक्ति और समाज का परस्पर गहरा तथा अनिवार्य संबंध है। दोनों को अलग-अलग करना असंभव है। मनुष्य को सामाजिक जीव इसलिए कहा जाता है क्योंकि समाज में इसका जन्म होता है, समाज में उसका विकास होता है और समाज में स्वस्थ समायोजन स्थापित करना ही उस के जीवन का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य होता है। अतः स्वस्थ जीवन यापन के लिए मनुष्य का सामाजीकरण अत्यंत आवश्यक है। इस उद्देश्य की पूर्ति-अर्थात् मनुष्य के सामाजीकरण के लिए समाज की स्थापना करता है। 

स्कूल ऐसी सामाजिक संस्था है जो व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक तथा बौद्धिक शक्तियों का विकास कर के उसे सामाजिक विकास में स्वस्थ एवं उपयोगी योगदान प्रदान करने के योग्य बनाती है। शिक्षा-शास्त्राी जहां इस बात पर जोर देते  रहे हैं वहां इस बात पर भी बल देते हैं कि शिक्षा-समुदाय या समाज केन्द्रित होनी चाहिए।  शिक्षा का समाज-केन्द्रित होना दो बातों की ओर लक्ष्य करता है। एक यह कि बच्चों को स्वस्थ जीवन व्यतीत करने के योग्य बनाया जाये। उनमें वे तमाम अभिवृतियां तथा योग्यताएं विकसित की जायें जो उन्हें समाज में स्वस्थ समायोजन स्थापित करने के योग्य बनाती हों और उन्हें सामाजिक विकास की ओर प्रेरित कर सकती हों। दूसरा यह कि बच्चों की शिक्षा सामाजिक अनुभूतियों पर आश्रित होनी चाहिए। 

बच्चा जब स्कूल में दाखिल होता है तो उस प्रकार की अनुभूतियां होती हैं। उनकी शिक्षा इन्हीं अनुभूतियों पर आधारित होनी चाहिए। यह तभी संभव हो सकता है जब स्कूल और समुदाय में अलग-थलग रख कर उस के द्वारा तो व्यक्ति का उचित समाजीकरण किया जा सकता है और ही शिक्षण को प्रभावशाली, उपयोगी तथा मनोवैज्ञानिक बनाया जा सकता है। स्कूल और समुदाय के परस्पर संबंध के महत्व को दर्शाते हुए

श्री के0जी0 साईदायन ने कहा है, ‘‘समुदाय का स्कूल स्पष्टतयः समुदाय की आवश्यकताओं तथा समस्याओं पर आधारित होना चाहिए। उस का शिक्षाक्रम सामुदायिक जीवन का संक्षिप्त रूप होना चाहिए। उस में वह सभी महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट बातें प्राकृतिक रूप से प्रतिबिंबित होनी चाहिए जो सामुदायिक जीवन में विद्यमान हैं।’’

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इसका अभिप्रायः यह है कि स्कूल समुदाय के समीप जाए तथा उसे प्रयोगशाला समझे। उसके स्रोतों की खोज करेउसकी संस्कृति को समझे, उसकी समस्याओं के समाधानों का सुझाव दे। इससे छात्रों को केवल भौतिक व्यवस्था अपितु मानव व्यवस्था का भी अन्वेषण करने के अवसर उपलब्ध होगें। भौतिक व्यवस्था में आकार, जलवायु, स्थान, वर्णन, भूमि, खनिजतथा अन्य ऐसी ही समस्याऐं शामिल हैं जिनके परिणामस्वरूप श्रेणियां तथा जातियां बनती हैं। इस अध्ययन के लिए समुदाय की सम्पूर्ण जांच तथा इसके स्रोंतों की शैक्षिक उद्देश्यों के लिए पूर्ण उपयोगिता आवश्यक है।

महत्वपूर्ण स्रोत



सूची अथवा वर्णन


संसाधनों का उपयोग


सामाजिक अध्ययन में समुदाय स्त्रोतों के उपयोग के लाभ


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