CTET 2015 EXAM NOTES


मौखिक कौशल

मौखिक कौशल के बारे में जानने से पहले छात्रांे आप के लिए यह आवश्यक ही अनिवार्य भी है कि आप भाषायी कौशलों से परिचित हो लें। तभी आप सभी कौशलों को अच्छी तरह से समझ सकेगें।
मनुष्य में भाषा सीखने की प्रवृत्ति स्वाभाविक रुप से विद्यमान रहती है। उसकी इस प्रवृत्ति का प्रमाण शैशवावस्था में मिल जाता है। जब वह अनुकरण के माध्यम से अपने माता-पिता तथा घर के अन्य सदस्यों से ध्वनियाँ ग्रहण करता है, ध्वनि समूहों को समझने लगता है और उन्हंे बोलने लगता है। यह स्वाभाविक प्रवृत्ति ही उसे भाषा सीखने की ओर प्रशस्त्त करती है।

भाषा एक कला है, दूसरी कलाओं की भाँति इसे सीखा जाता है और सतत अभ्यास से इसमें प्रवीणता आती है। जिस प्रकार दूसरी कलाओं में साधनांे की आवश्यकता होती है उसी प्रकार भाषा सीखने के लिए भी साधन की आवश्यकता होती है। साधन का दूसरा नाम अभ्यास है कला की साधना अन्ततः आदत बन जाती है। शुद्ध एवं शिष्ट बोलने वाले व्यक्ति को स्कूल में पढ़े व्याकरण के नियम याद न हो, लेकिन बोलने वक्त स्वतः उसके मुख से व्याकरण सम्मत शुद्ध भाषा ही निकलेगी।

भाषा ज्ञार्नाजन का सशक्त साधन है, परन्तु सबसे पहले भाषा कौशलों 'L.’ ‘S.’ ‘R.’ ‘W. में प्रवीणता प्राप्त करने की आवश्यकता होती है।
L. Listening skill. S. Speaking or oral skill
R. Reading skill. W. Writing skill

श्री एस.के. देशपांडे ने इस तथ्य पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा है-“भाषा-शिक्षण का सम्बन्ध केवल ज्ञान प्रदान करना या सूचनायें प्रदान करना मात्रा नहीं बल्कि भाषा सीखने वालो को इन चारो विविध कौशलों में दक्ष बनाना है।”

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मौखिक अभिव्यक्ति की भूमिका

मानव प्रधानतः अपनी अनुभूतियों तथा मनोवेगों की अभिव्यक्ति उच्चरित अथवा मौखिक भाषा में ही करता है प्रिय छात्रो! लिखित भाषा तो गौण तथा उसकी प्रतिनिधि मात्रा है, क्योंकि भावों की अभिव्यक्ति का साधन साधारणतः उच्चरित भाषा ही होती है। भावों के आदान-प्रदान का एक ही साधन है- भाव या वाणी।
आधुनिक जनतांत्रिक युग में जीवन की सफलता के लिए मौखिक भाव-प्रकाशन या वाणी उतना ही आवश्यक और अनिवार्य है जितना कि स्वयं हमारा जीवन। जीवन के प्रत्येक क्षेत्रा में व्यक्ति को प्रतिपल मौखिक आत्माभिव्यक्ति की शरण लेनी पड़ती है।

मौखिक अभिव्यक्ति का अर्थ


मौखिक अभिव्यक्ति का महत्त्व


मौखिक भाव-प्रकाशन शिक्षण के उद्देश्य


मौखिक अभिव्यक्ति की विशेषताएं

मौखिक अभिव्यक्ति कौशल की शिक्षण विधियाँ


7. वाद-विवादः बालकों के मानसिक स्तर व बौद्धिक स्तर को ध्यान में रखकर वाद-विवाद करवाया जा सकता है। अपने विचारों का तर्कपूर्ण प्रतिपादन करने का प्रशिक्षण देने के लिए वाद-विवाद एक उत्तम साधन है।

8. सत्संगः सत्संग का हमारे मौखिक भाव-प्रकाशन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। साधारणतः बालक जैसे वातावरण में रहेगा। उसका इसी प्रकार का भाव प्रकाशन होगा।

9. पाठ का सारः पाठ्य-पुस्तक के किसी पाठ या रचना को पढ़ कर छात्रा से उस पाठ का सार सुनना मौखिक
अभिव्यक्ति का अन्य उपयोगी साधन है।

10. भाषणः ‘भाषण’ भाव-प्रकाशन का एक सशक्त साधन है परन्तु ‘भाषण’ छात्रों के मानसिक एवं बौद्धिक स्तर के अनुकूल होना चाहिए।

11. नाटक-प्रयोगः नाटक द्वारा भावभिव्यक्ति का अच्छा अभ्यास हो जाता है। रंगशाला में बालक को आंगिक वाचिक एवं भावों के अभिनय की दीक्षा सफलतापूर्वक मिल सकती है।

12. स्वतंत्रा आत्मप्रकशनः बालकों को विभिन्न घटनाओं दृश्यों या व्यक्तिगत जीवन से जुड़े अनुभव सुनाने का अवसर देकर अध्यापक मौखिक भाषा का अभ्यास करा सकता है।

मौखिक भाव-प्रकाशन से सम्बन्धित शिक्षक की सावधानियाँ


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