CTET 2015 EXAM NOTES


परिवीक्षित अध्ययन विधि:  Supervised Study Method

पर्यवेक्षित अध्ययन का शाब्दिक अर्थ है कि शिक्षक के परिवीक्षण में शिक्षार्थी द्वारा किया जाने वाला अध्ययन का स्वाघ्याय इस समाजीकृत अभिव्यक्ति भी कहा जाता है। परिवीक्षण नवीन संकल्पना के अनुसार शिक्षक अधिकार भावना से निर्देश देने तथा आलोचना की दृष्टि से छिद्रान्नवेषण करने के स्थान पर छात्रों का पथ प्रदर्शन एवं उनकी कठिनाईयों का समाधान करता है

इस विधि में विद्यार्थी अपने आवंटित कार्य को शिक्षक की देखरेख में स्वतंत्र स्प से करते है। इस विद्या के अनुसार छात्रों को अध्ययन सम्बन्धी कुछ कार्य बता दिये जाते है और वे अपने अपने स्थान पर बैठे बैठे बताए हुए कार्य को करते रहते है और शिक्षक वहीं उनके कार्य का निरीक्षण व निर्देशन करता है। 

परिभाषा:- 
बाइनिंग तथा बाइनिंग ‘‘परिवीक्षित अध्ययन विधि से हमारा अर्थ है शिक्षक द्वारा कक्षा तथा छात्रों के एक वर्ग का उस समय परिवीक्षण किया जाना जबकि वे अपनी डेस्कों या मेजों पर कार्यरत होते है’’ 

वैसले ‘‘समाजीकृत अभिव्यक्ति बहुथा शिक्षण की एक विधि कही जाती है किन्तु यह वास्तव में एक आदर्श है, विधि नही। 
क्लार्क तथा स्टार -परिवीक्षित अध्ययन कांलाश छात्रों को दिये गये निर्देशन के अन्तर्गत कार्य करने तथा शिक्षक को पर्यवेक्षण एवं निर्देशन का अवसर देता है। 

पयेवेक्षित अध्ययन विधि की विशेषताएं - 

पर्यवेक्षित अध्ययन विधि की विशेषताएं निम्नलिखित है:-
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1. निर्देशित स्वाध्याय प्रणाली में छात्र और शिक्षक दोनो क्रियाशील रहते है।

2. इस प्रणाली में छात्रों की व्यक्तिगत क्रियाओं एवं प्रयासों की अधिक महत्व दिया जाता है।

3. यह पद्धति छात्रों की स्वाध्याय का अधिक अवसर दिया जाता है, जिससे स्वाघ्याय की प्रवृति विकसित होती है।

4. उसमें शिक्षक की मुख्य भूमिका छात्रों की सहायता करना एवं उन्हें अध्ययन के लिये निर्देशन देना होता है।

परिवीक्षित अध्ययन विधि के गुण निम्नलिखित है -

1. इस पद्धति में व्यक्तिगत संलग्नता के सिद्धान्त का अनुकरण किया जाता है।

2. मंद बुद्धि छात्र इस पद्धति से काफी लाभ उठा सकते है।

3. व्यक्तिगत संलग्नता अनुशासनहीनता ही समस्या को स्वतः ही दूर कर देती है।

4. इस पद्धति के व्यक्तिगत विभिन्नता पर आधारित होने के कारण प्रत्येक छात्र को अपनी क्षमता तथा योग्यता के अनुसार करने का अवसर प्राप्त होता है।

5. इस पद्धति के अन्तर्गत शिक्षक एवं छात्रों के मध्य मधुर सम्बन्ध स्थापित होेते है।

6. इस पद्धति में सीखने का महान गुण है।

परिवीक्षित अध्ययन विधि के दोष -

इस विधि में निम्नलिखित दोष है
1. यह विध प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के बालकों के लिये उपयुक्त नहीं है। यह उच्च कक्षाओं के लिये ही उपुर्यक्त है।

2. इस विधि के लिये समय की अधिक आवश्यकता होती है।

3. इस विधि में क्रियात्मक एवं भावात्मक पक्ष के विकास की उपेक्षा की जाती है जबतिक ज्ञानात्मक पक्ष की ओर ज्यादा ध्यान दिया जाता है।

4. इस विधि में समय अधिक लगता है जिसके कारण पाठयक्रम निर्धारित अवधि में पूरा करना सम्भव नहीं हो पाता। परिवीक्षित अध्ययन विधि हेतु पर्याप्त स्त्रोत, संदर्भ ग्रंथों एवं सामग्रियों की आवश्यकता होती है ये सामग्री उपलब्ध करना कठिन होता है।

पर्यवेक्षित अध्ययन विधि का महत्व 

इस विधि के महत्व को हम निम्न बिन्दुओं के द्वारा समझ सकते है।
1. पर्यवेक्षित अध्ययन विधि के द्वारा पिछडे हुए छात्रों को शिक्षा उपर्युक्त ढंग से दी जाती है।

2. पर्यवेक्षित अध्ययन विधि में छात्र की योग्यताओं और क्षमताओं को विकसित करने का सु-अवसर प्राप्त होता है।

3. यह विधि स्व-क्रिया पर आधारित है। शिक्षक के निर्देशन में छात्र स्वयं कार्य करते है।

4. पर्यवेक्षण अध्ययन का अन्तिम लक्ष्य पाठ्यवस्तु का स्वामित्व कराना होता है। अतः अन्त में स्वामित्व का परीक्षण किया जाता है।

5. पर्यवेक्षण अध्ययन छात्रों की पाठ्यवस्तु की गहनता का विकास कराता है।

6. इस पद्धति का आधार वैयक्तिक भिन्नता है।

7. हिन्दी शिक्षण में इसके द्वारा छात्रों में मौन वाचन की अच्छी आदत डाली जा सकती है।

8. शिक्षक द्वारा छात्र इस विधि में अधिक क्रियाशील रहते है।

9. आवंटन कार्य छात्र की योग्यता, रूचि, क्षमता के अनुसार दिया जाता है।

10. छात्रों को पुस्तकालय - वाचनालय, प्रयोगशालाओं तथा क्षेत्र में कार्य करने का मौका मिलता है। इसमें छात्रों को गृह कार्य भी दिये जाते है।

अन्त में सभी विद्धानों के मत है कि छात्रों मे शिक्षण की दृष्टि से इस विधि का अधिक महत्व है।

 पर्यवेक्षित अध्ययन विधि तथा प्रायोजना विधि में अन्तर: 


वैसे तो पर्यवेक्षित अध्ययन विधि तथा प्रायोजना विधि दोनो ही अपने आप में महत्वपूर्ण है। पर विभिन्नता तो सभी जगह पायी जाती है अतः इन दोनो विधियों में निम्नांकित अन्तर पाया जाता है।

1. पर्यवेक्षित अध्ययन विधि में सैद्धान्तिक कार्य (जैसे पठन, लेखन संक्षिप्तिकरण, विस्तारीकरण आदि कार्य) अधिक होता है जबकि प्रायोजना कार्य में व्यावहारिक कार्य उसका अभिन्न अंग होता है।

2. पर्यवेक्षित अध्ययन में शिक्षक द्वारा निर्देशित कोई प्रायोगिक अथवा स्वाध्याय सम्बन्धी कार्य में छात्र संलग्न होते है जबकि प्रायोजना विधि एक समस्यामूलक उद्देश्यपूर्ण कार्य है, जिसमें छात्र सामाजिक पर्यायवरण में अपने लक्ष्य की पूर्ति हेतु कार्य करते है।

3. प्रायोजना विधि में क्षेत्र कार्य भी होता है जबकि पर्यवेक्षित अध्ययन विधि में पुस्तकालय वाचनालय में संदर्भ ग्रंथों व अन्य स्त्रोत सामग्री के अध्ययन का कार्य प्रमुख होता है।

4. प्रायोजना कार्य में सभी छात्र वर्गो में विभक्त होकर प्रायोजना के किसी न किसी पक्ष से सम्बद्ध कार्य करते है जबकि पर्यवेक्षित अध्ययन विधि में कोई एक कार्य ही छात्र अपनी गति अनुसार सम्पन्न करते है अथवा कोई व्यक्तिगत आंवटित कार्य भी कर सकता है।

5. पर्यवेक्षित अध्ययन विधि का उद्देश्य महत्व अध्ययन द्वारा पाठ्यवस्तु को हृदयंगम करना होता है, जबकि प्रायोजना कार्य सर्दव समस्यापुर्वक होता है जिसे किसी समस्या के समाधान हेतु किया जाता है।

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