CTET 2015 EXAM NOTES IN HINDI MEDIUM

अभिक्रमित अनुदेशन के प्रकार : TYPES OF PROGRAMMED INSTRUCTION

अभिक्रमित अनुदेशन के प्रकार यों तो अभिक्रमित अनुदेशन एक सम्पूर्ण शैक्षिक कार्यक्रम है, किन्तु इसकी रचना के आधार पर अभिक्रमित अनुदेशन का वर्गीकरण इस प्रकार किया जा सकता है।

1. रेखीय अभिक्रमित अनुदेशन
2. शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन
3. मैथेटिक्स अभिक्रमित अनुदेशन
4. स्वनिर्देशित अभिदेशित अनुदेशन
5. कम्प्यूटर आधारित अभिक्रमित अनुदेशन 

रेखीय अभिक्रमित अनुदेशन: (LinearProgramming)



रेखीय अभिक्रम का स्वरूप रेखीय अभिक्रम में विषयवस्तु को छोटे छोटे पदों में विभक्त कर दिया जाता है। इन पदों में तीन तत्व निहित होते है।

रेखीय अभिक्रम में  पदों के प्रकार रेखीय अभिक्रम में पद प्रमुखतः चार प्रकार के बनाये जाते है।

रेखीय अभिक्रम की विशेषताएं रेखीय अभिक्रम का अधिगम की क्रियाओं में विशेष महत्व है, इसीलिए शिक्षण में इसका प्रयोग विशेषतः लोकप्रिय है। 

इसकी निम्नलिखित विशेषताएॅं हंै।


रेखीय अभिक्रम की सीमायें


शाखीय अभिक्रमण (Branching Programming)


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इस विधि को आन्तरिक अभिक्रम भी कहते हैं। इसका आरम्भ नारमन कराऊडर ने किया था। उसने इसकी परिभाषा में इसे एक ऐसा अभिक्रम बताया जो अधिगम को छात्रों की आवश्यकता के अनुसार संगणक जैसे बाह्य उपकरण के बिना अनुकूल बनाता है 

शाखीय अभिक्रमण के दोष (Demerits of Branching Programming)


3. मैथेटिक्स अभिक्रमण अथवा अवरोही अभिक्रमण (Mathetics Programming)



मैथेटिक्स अभिक्रमण के दोष (Demerits of Mathetics Programming)

  

4. स्वनिदेशित अभिक्रमित अनुदेशन:- 
स्वनिदेशित अभिक्रम को संयुक्त अभिक्रम के नाम से भी जाना जाता हैं यहां संयुक्त का अर्थ सहायता प्रदान करना है। यह अभिक्रम एक ऐसा साधन है, जो अभिक्रमित अनुदेशन तथा उत्तम प्रकार की पाठ्य पुस्तकों में समन्वय स्थापित करता हैं। इस प्रकार इस अभिक्रम में अभिक्रमित शिक्षण सहायता सामग्री तथा पाठय पुस्तकों का उपयोग किया जाता है।

5. कम्प्यूटर आधारित अभिक्रमित अनुदेशनः- 
आज विज्ञान और तकनीकी के प्रभाव ने मानव चिन्तन को वैज्ञानिक बना दिया जिसके फलस्वरूप प्रत्येक क्षेत्र में यन्त्रीकरण का बोलबाला है। यन्त्रीकरण की इस दौड में शिक्षा भी पीछे नहीं रही है, क्यों कि प्रतिदिन बदलने वाली सामाजिक आर्थिक संरचना में शिक्षा के गुणात्मक स्वरूप पर बहुत बल दिया जा रहा है, फलतः शिक्षा जगत में में संगणकों का आगमन हुआ है। छात्रों की बढती हुई संख्या को देखते हुए उनके लिये उत्तम ढंग से शिक्षण अधिगम की परिस्थितियां उत्पन्न करके, ज्ञान के संचार प्रवाह में संगठन को प्रभावशाली माध्यम माना जा रहा है। 

कम्प्यूटर आधारित अनुक्रमित अनुदेशन में प्रायः चार बिन्दुओं पर अधिक बल दिया जाता है।
1. ड्रिल और अभ्यास 2. ट्यूटोरियल
3. प्रश्नोत्तर 4. निदानात्म्क परीक्षण

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