पावलव का शास्त्रीय अनुबंधन (अनुकूलित-अनुुिक्रिया) का सिद्धातं(Pavlov Theory of conditioned Response)

 इस सिद्धान्त का प्रतिपादन 1904 में में  पावलव ने किया था। उसने अनुबंधित क्रिया(Conditioned Response) को समझाने के लिए कुत्ते के ऊपर प्रयोग किया। प्रारम्भ में भूखे कुत्ते के मंुह में भोजन देखकर लार आ जाना स्वाभाविक क्रिया है।
1) पावलव में प्रयोग के प्रारम्भ में कई दिनो  तक खाने के साथ घण्टी बजा कर खाना दिया। (खाना + घण्टी) यह प्रयोग कई दिनांे तक दोहराने पर पाया गया कि खाना एवं घण्टी में सम्बन्ध उत्पन्न हो जाता है। एवं स्वाभाविक क्रिया-लार टपकना होती है।

2) इसके बाद केवल घण्टी बजाई परन्तु खाना साथ में नहीं दिया गया। इससे यह पाया गया कि कुत्ता स्वाभाविक क्रिया (लार टपकती है) करता है। इस प्रयोग को इस प्रकार दर्षाया जा सकता है-

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इस सिद्धांत का प्रयोग पशुआंे एवं मनुष्यों के व्यवहार को सुधारने व परिमार्जन में महत्वपूर्ण सिद्ध होता है।

सिद्धातं:- अस्वाभाविक (कृत्रिम) उत्तेजना के प्रति स्वाभाविक क्रिया का उत्पन्न होना अनुकूलित अनुक्रिया कहलाती है। उदाहरण - मिठाई की दुकान को देखकर बच्चों के मुंह से लार टपकने लगता है।


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