उद्दीपन-अनुुिक्रिया का सिद्धान्त (Thorndike’s Stimulus Response Theory):- 

किसी भी कार्य को व्यक्ति एकदम नहीं सीख पाता है। सीखने की प्रक्रिया में व्यक्ति प्रयत्न करता है और कठिनाईयां आती हैं तथा गलती व भूलंे भी करता है। लगातार कोषिष करते रहने से भूलें व गलती कम होती जाती हैं। इसलिए इस सिद्धांत को प्रयत्न और भूल(Trial and error) का सिद्धात कहते हैं।
थार्नडाइक ने इस सिद्धांत का परीक्षण भूखी बिल्ली पर किया। उसने प्रयोग में भूखी बिल्ली को पिंजड़े में बंद कर दिया। पिंजड़े का दरवाजा एक खटके के दबने से खुलता था। उसके बाहर भोजन रख दिया। बिल्ली में भोजन (उद्दीपक) देखकर प्रतिक्रिया आरम्भ की। उसने अनेक प्रकार से बाहर निकलने का प्रयत्न किया। एक बार संयोग से उसका पंजा खटके पर पड़ गया। और दरवाजा खुल गया। थार्नडाइक ने इस प्रयोग को अनेक बार दोहराया। अन्त में एक समय ऐसा आ गया जब बिल्ली किसी प्रकार की भूल न करके खटके को दबा कर पिंजड़े का दरवाजा खोलने लगी। इस प्रकार उद्दीपक और प्रतिक्रिया में संबंध स्थापित हो गया।

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मेज (Maze)उपकरण प्रयोग  द्वारा सीखने के सिद्धान्त का सत्यापन:-

उपरोक्त प्रयोग के आधार पर थार्नडाइक ने सीखने के प्रमुख तीन नियमों एवं सिद्धान्तों का सत्यापन किया।

थार्नडाइक  के उद्दीपन-अनुुिक्रिया सिद्धान्त की आलोचना के प्रमुख बिन्दु इस प्रकार हैंः-

सिद्धान्त का शिक्षा में महत्व



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