किसी भी कार्य को सुचारू रुप से करने के लिये आवश्यक है कि उसके उद्देश्य व लक्ष्य निर्धारित किए जाए उद्देश्य क्रिया को निश्चित दिशा प्रदान करते हैं। शिक्षण विधियां और पाठ्यक्रम शिक्षा के उद्देश्यों पर निर्भर करते हैं। उद्देश्य निश्चित करके कार्य को आरम्भ किया जाता है। संसार मे जितनी भी क्रियाएं होती है वे किसी लक्ष्य की और उन्मुख होती हैं।
जब कोई भी व्यक्ति किसी कार्य को करता है तो वह सोचकर करता हैं कि इसका अन्त भी है। इसलिये कोई भी क्रिया लक्ष्यविहीन नही की जा सकती। वैज्ले ने ठीक ही कहा हैं, ”उद्देश्यों के ज्ञान के बिना अध्यापक उस नाविक के समान है जिसे अपने लक्ष्य का ज्ञान नहीं है तथा छात्रा उस पतवार विहीन नौका के समान है जो समुद्र की लहरों में थपेडे खाती तट की ओर बह रही है।’’ क्या पढ़ाएं पाठ्यक्रम में आता हैं, कैसे पढ़ाएं शिक्षण विधियों की जानकारी से सम्बन्धित है तथा क्यों पढ़ाए शिक्षा के उद्देश्य निर्धारित करते हैं।

 लक्ष्य तथा उद्देश्यों में अंतर (Difference between Aims and objectives)


 लक्ष्यों एवं उद्देश्यों का महत्व (Importance of Aims and Objectives)

लक्ष्य व उद्देश्य शिक्षा के कुशल प्रशासन तथा प्रबन्धन मे मदद करते हैं अध्यापक का मार्गदर्शन करते है तथा विद्यार्थी को पढ़ने के लिये प्ररेणा प्रदान करते हैं। मानव जीवन के प्रत्येक पक्ष तथा दैनिक जीवन की प्रत्येक क्रिया की सफलता के लिये उद्देश्यों का होना नितान्त आवश्यक हैं जिसके निम्न कारण हैंः-
1. उद्देश्य मार्गदर्शक हैं, यह अध्यापक को रास्ते से भटकनें नहीं देते।
2. यह पाठ्यक्रम के आधार पर शिक्षण विधियों के चयन में सहायक होते हैं।
3. शिक्षण में प्रयुक्त सहायक सामग्री एवं साधनों के चयन में सहायक है।
4. यह विद्यार्थी को कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करते हैं और मन से उसे दृढ़ निश्चयी बनाते हैं।
5. यह शिक्षा के मूल्यांकन में भी सहायक सिद्ध होते हैं।

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