कोलबर्ग के सिद्धांत - पियाजे की तरह कोलबर्ग ने भी पाया कि नैतिक विकास कुछ अवस्थाओं में होता है। कोलबर्ग ने पाया कि यह अवस्थाएं सार्वभौमिक होती है। बीस साल तक बच्चों के साथ एक विशेष प्रकार के साक्षात्कार का प्रयोग करने के बाद कोलबर्ग इन निर्णयों पर पहुंचे।
इन साक्षात्कारों में बच्चों को कुछ ऐसी कहानियां सुनाई गईं जिनमें कहानियों के पात्रों के सामने कई नैतिक उलझने थीं। उसमें से सबसे लोकप्रिय दुविधा यह है- यूरोप में एक महिला मौत के कगार पर थी। डाक्टरों ने कहा कि एक दवाई है जिससे शायद उसकी जान बच जाए। वो एक तरह का रेडियम था जिसकी खोज उस शहर के एक फार्मासिस्ट ने उस दौरान ही की थी। दवाई बनाने का खर्चा बहुत था और दवाई वाला दवाई बनाने के खर्च से दस गुना ज्यादा पैसे मांग रहा था। उस औरत का इलाज करने के लिए उसका पति हाइनज उन सबके पास गया जिन्हें वह जानता था। फिर भी उसे केवल कुछ पैसे ही उधार मिले जो कि दवाई के दाम से आधे ही थे। उसने दवाई वाले से कहा कि उसकी पत्नी मरने वाली है, वो उस दवाई को सस्ते में दे । वह उसके बाकी पैसे बाद में देगा। फिर भी दवाई वाले ने मना कर दिया। दवाई वाले ने कहा कि मैंने यह दवाई खोजी है, मैं इसे बेच कर पैसा कमाऊंगा। तब हाइनज ने मजबूर होकर उसकी दुकान तोड़ कर वो दवाई अपनी पत्नी के लिए चुरा ली।

यह कहानी उन ग्यारह कहानियों में से एक है, जो कोलबर्ग ने नैतिक विकास को जानने के लिए इस्तेमाल की थीं। यह कहानी पढ़ने के बाद जिन बच्चों से साक्षात्कार लिया गया उन्हें नैतिक दुविधा पर बनाए गए कुछ प्रश्नों के उत्तर देने होते थे।

क्या हाइनज को वो दवाई चुरा लेनी चाहिए थी? क्या चोरी करना सही है या गलत है! क्यों? क्या यह एक पति का कत्र्तव्य है कि वो अपनी पत्नी के लिए दवाई चोरी करके लाए? क्या दवाई बनाने वाले को हक है कि वो दवाई के इतने पैसे मांगे? क्या ऐसा कोई कानून नहीं है जिससे दवाई की कीमत पर अंकुश लगाया जा सके, क्यों और क्यों नहीं?

कोलबर्ग के द्वारा दी गई अवस्थाएं


साक्षात्कार द्वारा दिए गए उत्तरों के आधार पर कोलबर्ग ने नैतिक चिंतन की तीन अवस्थाएं बताई हंै, जिन्हें
पुनः दो-दो चरणों में विभाजित किया गया है।

कोलबर्ग का नैतिक सिद्धांत (Kohlberg Theory of Moral Development), बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र, शिक्षा मनोविज्ञान, Child Development and Pedagogy, Educational Psychology, CTET Exam Notes, TET Study Material, NET, B.ED, M.ED Study Notes.

कोलबर्ग मानते हंै कि यह स्तर एवं अवस्थाएं एक क्रम में चलते हैं और उम्र से जुड़े हुए हैं। 9 साल की उम्र से पहले बच्चे पहले स्तर पर काम करते है। अधिकतर किशोर तीसरी अवस्था में सोचते पाए जाते हैं पर उनमें दूसरी अवस्था और चैथी अवस्था के सोच विचार के कुछ लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। प्रारंभिक वयस्कता में पहुॅचने पर कुछ थोड़े से लोग ही रूढ़िपूर्णता से ऊपर उठकर नैतिक तर्क देते है।

<< बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

Post a Comment Blogger

 
Top