अधिगम अशक्तताएँ

आपने अवश्य सुना होगा, पढ़ा होगा या स्वयं देखा होगा कि विद्यालयों में हजारों बच्चे पढ़ने के लिए प्रवेश तो ले लेते हैं परंतु उनमें से वुफछ बच्चों के लिए शिक्षण प्रक्रिया की मांग को पूरा कर पाना बहुत कठिन होता है और परिणामस्वरूप वे विद्यालय की पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को बीच में पढ़ाई छोड़ देने वाले छात्रा कहते हैं।
पढ़ाई को बीच में छोड़ देने के अनेक कारण हो सकते हैं जैसे - संवेदी अक्षमता, बौ(िक अशक्तता, सामाजिक एवं सांवेगिक व्यतिक्रमपरिवार की गरीबी, सांस्कृतिक विश्वास और मानक या अन्य पर्यावरणी प्रभाव। इन कारकों के अतिरिक्त अधिगम अशक्तता भी एक ऐसा कारक है, जो पढ़ाई को जारी रखने में व्यवधान डालता है। इसके कारण विद्यालय अधिगम अर्थात ज्ञान तथा विभिन्न कौशलों का अर्जन करना बहुत कठिन हो जाता है। सीखने में अशक्त बच्चे परीक्षा उत्तीर्ण करके अगली कक्षा में नहीं जा पाते और पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं।

अधिगम अशक्तता (learning disability ) एक सामान्य पद है। इसका अर्थ विभिन्न प्रकार के उन विकारों के समूह से है, जिनके कारण किसी व्यक्ति में सीखने, पढ़नेलिखने, बोलने, तर्वफ करने तथा गणित के प्रश्न हल करने आदि में कठिनाई होती है। इन विकारों के ड्डोत बच्चे में जन्मजात रूप से अंतर्निहित होते हैं। ऐसा विश्वास किया जाता है कि वेंफद्रीय तंत्रिका तंत्रा की कार्यविधि में समस्याओं के कारण अधिगम अशक्तता पाई जाती है। अधिगम अशक्तता के साथ-साथ किसी बच्चे में शारीरिक अक्षमता, संवेदी अक्षमताबौ(िक अशक्तता भी हो सकती है या अधिगम अशक्तता इनके बिना भी हो सकती है।

बच्चों में पाई जाने वाली अधिगम अशक्तता एक पृथक प्रकार की अक्षमता है, जो उन बच्चों में भी पाई जा सकती हैजो सामान्य से श्रेष्ठ बु(ि वाले, सामान्य संवेदी प्रेरक तंत्रा वाले हैं तथा जिनको सीखने के पर्याप्त अवसर प्राप्त होते हैं। यदि अधिगम अशक्तता का समुचित प्रबंध नहीं किया जाए तो यह जीवनपर्यंत बनी रहती है और व्यक्ति के आत्म-सम्मान, पेशासामाजिक संबंधों तथा दिन-प्रतिदिन की क्रियाओं को प्रभावित करती है।

अधिगम अशक्तता के लक्षण

अधिगम अशक्तता के अनेक लक्षण हैं। अधिगम अशक्तता वाले बच्चों में ये लक्षण भिन्न-भिन्न संयोजनों में प्रकट होते हैं चाहे उनकी बु(ि, अभिप्रेरणा तथा अधिगम के लिए किया गया परिश्रम वुफछ भी हो।

1. अक्षरों, शब्दों तथा वाक्यांशों को लिखने में, लिखी हुई सामग्री को पढ़ने में तथा बोलने में बहुधा कठिनाई पाई जाती है। यद्यपि उनमें श्रवण दोष नहीं होता है तथापि उनमें सुनने की समस्याएँ पाई जाती हैं। ऐसे बच्चे सीखने के लिए योजना बनाने या इसके लिए कोई तरकीब खोजने में अन्य बच्चों की अपेक्षा बहुत भिन्न होते हैं।

2. अधिगम अशक्तता वाले बच्चों में अवधान से जुड़े विकार पाए जाते हैं। वे किसी एक विषय पर देर तक ध्यान वेंफद्रित नहीं कर पाते तथा उनका ध्यान शीघ्र ही टूट जाता है। अवधान की इस कमी के कारण अनेक बार उनमें अतिक्रिया उत्पन्न हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप वे हमेशा गतिशील रहते हैं, वुफछ वुफछ करते रहते हैं तथा विभिन्न सामानों को अनवरत रूप से इधर से उधर हटाते रहते हैं।

3. अधिगम अशक्तता वाले बच्चों में स्थान समय की समझदारी की कमी आम लक्षण हैं। ये नयी जगहों को आसानी से नहीं पहचान पाते और अक्सर खो जाते हैं। कालबोध की कमी के कारण ये अपने काम के स्थान पर या तो समय से बहुत पहले या पिफर बहुत विलंब से पहुँचते हैं। इसी तरह इनमें दिशाबोध की भी कमी होती है। ऊपर, नीचे, दाएँ, बाएँ आदि में भेद करते हुए कार्य करने में इनसे अक्सर गलतियाँ होती हैं।

4. अधिगम अशक्तता वाले बच्चों का पेशीय समन्वय तथा हस्त-निपुणता अपेक्षाकृत निम्न कोटि का होता है। यह उनके शारीरिक संतुलन के अभाव, पेंसिल को नुकीला करने तथा दरवाशे का दस्ता ;हैंडिलद्ध पकड़ने में अक्षमता एवं साइकिल चलाना सीखने में कठिनाई से स्पष्ट होता है।

5. ये बच्चे काम करने के मौखिक अनुदेशों को समझने और अनुसरण करने में असपफल होते हैं।

6. सामाजिक संबंधों का मूल्यांकन भी ये ठीक से नहीं कर पाते। उदाहरण के लिए, ये नहीं जान पाते कि कौन सा सहपाठी इनका अधिक मित्रा है और तटस्थ कौन है। ये शरीर भाषा को सीखने एवं समझने में भी अक्षम होते हैं।

7. अधिगम अशक्तता वाले बच्चों में आम तौर से प्रात्यक्षिक विकार भी पाए जाते हैं। दृष्टि, श्रवण, स्पर्श तथा गति से जुड़े संकेतों का प्रत्यक्षण करने में इनसे अधिक त्राुटियाँ होती हैं। ये दरवाजे की घंटी तथा पफोन की घंटी में विभेद करने में असपफल होते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि इनमें संवेदी तीक्ष्णता नहीं होती है। ये सिर्फ निष्पादन में इसका उपयोग करने में असपफल रहते हैं।

8. अधिगम अशक्तता वाले अधिकांश बच्चों में पठनवैकल्य ;कलेसमगपंद्ध के लक्षण पाए जाते हैं। ये बहुत बार अक्षर और शब्दों की नकल नहीं कर पाते हैं जैसे- कमर तथा रकम में, सपूत और कपूत में, ‘ तथा, ‘ तथा पफ में अंतर करना इनके लिए बहुत कठिन होता है। ये शब्दों को वाक्यों के रूप में संगठित करने में अपेक्षाकृत अक्षम होते हैं।

ऐसा सोचना गलत है कि अधिगम अशक्तता वाले बच्चों का इलाज नहीं हो सकता है। उपचारी अध्यापन विधि के उपयोग से बहुत लाभ होता है और कक्षा में ये अन्य बच्चों की तरह हो सकते हैं। शिक्षा मनोवैज्ञानिकों ने ऐसी शिक्षण विधियों का विकास किया है जिनसे अधिगम अशक्तता वाले बच्चों में पाए जाने वाले अनेक लक्षणों को दूर किया जा सकता है।

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