नैतिक  सोच - लोग कैसे सोचते हैं? कि क्या सही है और क्या गलत है? क्या नैतिक सवालों पर बच्चे भी वैसे ही विचार करते हैं जैसे कि वयस्क? पियाजे के पास इन सवालों के लेकर कुछ विचार थे और लाॅरेंस कोलबर्ग के पास भी कुछ विचार थे।
पियाजे  का  सिद्धातं - बच्चे नैतिक मुद्दो के बारे में  है, इसके बारे में पियाजे (1932 ) ने रूचि जाग्रत की । रूचि जागृत की थी। उन्होंने बहुत अधिक गहराई से चार से बारह साल के उम्र के बच्चों का अवलोकन और साक्षात्कार किया। पियाजे ने बच्चों को कंचे खेलते हुए देखा ताकि वे यह जान सकें कि बच्चों ने खेल के नियम पर किस तरह से विचार किया। उन्होंने बच्चों से नैतिक मुद्दों के बारे में भी बात की जैसे कि सजा और न्याय। पियाजे ने पाया कि जब बच्चे नैतिकता के बारे में सोचते हैं, तो वे दो अलग-अलग अवस्थाओं से होकर गुजरते है।
पियाजे  का नैतिक सिद्धातं (Piaget Theory of  Moral Development), बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र, शिक्षा मनोविज्ञान, Child Development and Pedagogy, Educational Psychology, CTET Exam Notes, TET Study Material, NET, B.ED, M.ED Study Notes.

नैतिक तर्क को लेकर इस तरह के परिवर्तन कैसे आते हैं? पियाजे मानते हंै कि जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते है उनकी सोच सामाजिक मुद्दों के बारे में गहरी होती चली जाती है। प्याजे का मानना है कि सामाजिक समझ साथियों के साथ आपसी लेन-देन से आती है। जिन साथियों के पास एक जैसी शक्ति और ओहदा होता है वहां योजनाओं के बीच समझौता किया जाता है और सहमत न होने पर तर्क दिया जाता है और आखिर में सब कुछ ठीक हो जाता है। अभिभावक और बच्चे के रिश्तों में जहां अभिभावक के पास शक्ति होती है लेकिन बच्चों के पास नहीं, वहां नैतिक तर्क की समझ को विकसित करने की संभावना कम रहती है। क्योंकि अधिकतर नियम आदेशात्मक तरीके से दिए जाते हैं।

<< बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

Post a Comment Blogger

 
Top