मनोविज्ञान की परिभाषाएं:-

मनोेविज्ञान का अर्थ - ‘‘मन के विज्ञान’’ को मनोविज्ञान कहा जाता हंै। भारतीय वाड्मय में उसकी प्रकृति पष्चिम के मनोविज्ञान के समान शैक्षणिक (Educational) नहीं होकर आध्यामित्क (Spritual) हैं। अतः उसे ‘‘मन का ज्ञान’’ कहना अधिक सार्थक प्रतीत होता है। प्राचीन भारत में मनोविज्ञान को आत्मा के विज्ञान और चेतना के विज्ञान के रूप में लिया जाता है। भारतीय मनीषी आध्यात्मिक साधना, जिसमें ध्यान, समाधि और योग भी सम्मिलित था, के द्वारा जो अनुभव एवं अनुभूतियां प्राप्त करते थे उनके आधार पर मनोवैज्ञानिक समस्याओं का समाधान भी तलाषा जाता था।
यूं तो पाष्चात्य मनोविज्ञान का उद्भव भी दर्षन से हुआ हैं। मनोवैज्ञानिक मन के अनुसार ‘‘मनोविज्ञान, व्यवहार और अनुभूति का एक निष्चित विज्ञान है जिसमें व्यवहार को अनुभूति के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है’’।

मनोविज्ञान की विकास की लम्बी यात्रा के दौरान मनोवैज्ञानिकों एवं मनीषियों ने चिंतन मनन किया तथा मनोविज्ञान के स्वरूप को निर्धारित किया। अनेक मनोवैज्ञानिकों ने मनोविज्ञान को निम्नानुसार परिभाषित किया है।

1. स्किनर- ‘‘मनोविज्ञान व्यवहार और अनुभव का विज्ञान है।’’
2. मन- ‘‘आधुनिक मनोविज्ञान का संबधं व्यवहार की वैज्ञानिक खोज से है।’’

मनोविज्ञान की शाखाएंः-


 शिक्षा और मनोविज्ञान  का संबंध्:-


मनोविज्ञान का शिक्ष् ाा में  योगदान:-

1. बालक का महत्व।
2. बालकों की विभिन्न अवस्थाओं का महत्व।
3. बालकों की रूचियों व मूल प्रवृत्तियों का महत्व।
4. बालकों की व्यक्तिगत विभिन्नताओं का महत्व।
5. पाठ्यक्रम में सुधार।
6. पाठ्यक्रम सहगामी क्रियाओं पर बल।
7. सीखने की प्रक्रिया में उन्नति।
8. मूल्यांकन की नई विधियां।
9. शिक्षा के उद्देश्य की प्राप्ति व सफलता।
10. नये ज्ञान का आधारपूर्ण ज्ञान।

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