22 January 2015

रचना शिक्षण

CTET 2015 EXAM NOTES

रचना शिक्षण 

रचना की भूमिका: संसार के प्रत्येक व्यक्ति अपने भावों व विचारों को अभिव्यक्त करते हैं चाहे मौखिक या लिखित रूप में। मानव की इसी चाह में ‘रचना’ का अर्थ निहित है सीधे व सरल शब्दों में ‘भाषागत प्रकाशन’ ही रचना है। भाषा-क्षेत्रा में इसका अर्थ है ‘भाषा में विचारों का स्पष्टीकरण। भाषा-शिक्षण के विभिन्न उद्देश्यों में एक उद्दरेश्य विद्यार्थियों को अपने भावों, विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रकट करने की योग्यता विकसित करना है। अतः उन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति हेतु उसे शुरू से रचना कार्यों की ओर अग्रसर किया जाता है।

रचना का अर्थ

रचना शब्द 'composition' का हिन्दी रूपान्तरण है। भाषा के क्षेत्रा में रचना के अन्तर्गत भावों व विचारों को शब्द-समूहों में सँवारते है। विचारों को क्रमबद्ध करके शब्द-समूह में व्यक्त करना, आत्माभिव्यक्ति का अभ्यास, भावों एवं विचारों की अभिव्यक्ति, तथा कलात्मक ढंग से विचार व्यक्त करना ही रचना है।

रचना के प्रकार


रचना शिक्षण में लेखन का महत्त्व


रचना की शिक्षा के सोपान


रचना शिक्षण के प्रयोग में आने वाली शिक्षण-प्रणालियाँ

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