9 July 2018

रॉलेक्ट एक्ट क्या है ?

रॉलेक्ट एक्ट क्या है ?


प्रथम विश्वयुद्ध में भारतीयों ने अंगरेजी साम्राज्य की सुरक्षा के लिए बहुत अधिक सहयागे किया। उन्हें यह उम्मीद थी कि युद्ध समाप्ति के बाद ब्रिटिश सरकार भारतीय जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करेगी। लेकिन सरकार की भारतीयों को स्वायत्तता देने की कोर्इ इच्छा नहीं थी। वह तो देश में फैल रही राष्ट्रीयता एवं क्रांतिकारी भावना से भयभीत थी। इसीलिए उसने 1918 में सर सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता में एक समिति नियुक्ति की। इस समिति की सिफारिशों के आधार पर दो विधेयक पश्े ा किये गये। इन विधेयकों को तमाम गैर भारतीय सदस्यों के विरोध के बावजूद पेश कर दिया गया। इन विधेयकों अन्तर्गत यह व्यवस्था की गर्इ थी कि जिस व्यक्ति के राजद्रोही होने का संदेह जो उस पर नियंत्रण रखा जाए, ऐसी किसी भी सामग्री के प्रकाशन को, जिससे जनता में राष्े ा की भावना फैल,े अपराध माना जाएगा। वस्तुत: इस कानून के द्वारा युद्ध काल में नागरिक अधिकारों पर जो प्रतिबंध लगाए गए थे उन्हे ही स्थायी बनाने का एक प्रयास था।

भारतीय जनता के सभी वर्गों में इन विधेयकों के प्रति गहरा आक्रोश था, लेकिन इसके विरोध करने का जो ढंग गाँधीजी नें सुझाया वह अनूठा और व्यावहारिक था। इसकी सिफारिशों पर प्रतिक्रिया करते हुए गाँधीजी ने कहा कि ‘‘उन सिफारिशों ने मुझे चौंका दिया।’’ यह साम्राज्य के एक उस वफादार नागरिक के विचार परिवर्तन का बिन्दु था जिसको अब तक यह विश्वास था कि ‘‘साम्राज्य कुल मिलाकर भलार्इ के लिए काम करने वाली शक्ति ही है। इस परिवर्तन ने उन्हें एक एसे ा विद्राहे ी बना दिया जिसको यकीन हो चुका था कि ब्रिटिश साम्राज्य आज शैतानियत का प्रतीक है।’’ इसके विरोध में देशव्यापी हड़ताल का आहवान किया गया। एक सत्यापन सभा का गठन किया गया। इस सभा ने अपना समस्त ध्यान प्रचार साहित्य छापने एवं सत्याग्रह की शपथ के लिए हस्ताक्षर एकत्रित करने में लगाया। स्वयं गाँधीजी भारत के तूफानी दौरे पर निकल पडे़। मार्च और अप्रैल के बीच उन्होंने बम्बर्इ (मुम्बर्इ), दिल्ली, इलाहाबाद, लखनऊ और दक्षिण भारत के अनेक नगरों की यात्रा की। देश व्यापी हड़ताल के लिए पहले 30 मार्च और बाद में 6 अप्रैल की तिथि सुनिश्चित की गर्इ। हड़ताल के आहवान का आशातीत उत्तर मिला। देश के अनेक हिस्सों में इस हड़ताल को सफल बनाने की होड़ लग गर्इ। गाँधीजी ने लिखा : ‘‘एक कोने से दूसरे कोने तक संपूर्ण भारत में, भारत के एक-एक गांव में हड़ताल पूर्ण सफल रही।’’

दिल्ली में 30 मार्च को सत्याग्रह सभा आयाेि जत की गर्इ। पद्रर्शनों में हिन्दु-मुसलमान एक साथ शामिल हुए। यह रॉलेट एक्ट विरोधी आन्दोलन तीन चरणों में चला। 4 अप्रैल को जामा मस्जिद में एकत्र मुसलमानों को आर्य समाजी नेता श्रद्धापदं ने संबोधित किया। गाँधीजी के दिल्ली प्रवेश निषेध के समाचार से यह अफवाह फैली कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है इससे लोगों की भावनाए  भड़क उठी और 10 अप्रैल तक लगातार हड़ताल रही। बम्बर्इ में गाँधी स्वयं उपस्थित थे। अहमदाबाद में और अन्य स्थानों पर भी दंगे भड़क उठे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के विरूद्ध दमनात्मक कार्रवाइयां की।

पंजाब में इस आंदोलन की व्यापकता सर्वाधिक रही। पूरे प्रांत में कर्इ विरोध-सभाओं का आयोजन हो चुका था। 6 अप्रैल को लाहौर और अन्य शहरों में हड़ताल हुर्इ। 10 अप्रैल को यह समाचार मिलने पर कि गाँधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया। लाहौर में जूलूस निकाला गया। पुलिस ने इस भीड़ पर गोलियां बरसार्इ लेकिन अमृतसर में अधिक भयावह घटना घटने वाली थी। वहाँ 6 अपै्रल को हुर्इ हड़ताल शांितपूर्ण रही। इसके पश्चात् 9 अपै्रल को हिंदुओं, मुसलमानों और सिक्कों का एक बड़ा जुलूस निकाला गया। अमृतसर 10 अप्रैल को सैफुˆीन किचलू और डा. सत्यपाल की गिरफ्तारी के खिलाफ टाउन हॉल और पोस्ट ऑफिस पर हमले किए गए, टेलिग्राफ तार काट दिए गए और अंग्रेजों को मारा-पीटा गया। औरतों पर भी हमले किए गये। शहर को सैनिक अधिकारियों को सौंप दिया और नगर का प्रशासन जनरल डॉयर के हाथों सौंप दिया गया। डायर ने चेतावनी दी कि अगर सभाएँ और जुलूस आयोजित किये गए तो उसके गंभीर परिणाम होंगें।


.
Click here to join our FB Page and FB Group for Latest update and preparation tips and queries

https://www.facebook.com/tetsuccesskey/

https://www.facebook.com/groups/tetsuccesskey/

No comments:

Post a Comment