12 July 2019

✅ 15वाँ वित्त आयोग :

✅ 15वाँ वित्त आयोग :


✅ 15वाँ वित्त आयोग :

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 22 नवंबर, 2017 को 15वें वित्त आयोग के गठन को मंज़ूरी प्रदान की।

15वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशें वर्ष 2020-25 के दौरान लागू की जाएंगी।

अभी तक 14 वित्त आयोगों का गठन किया जा चुका है। 14वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशें वित्तीय वर्ष 2015-20 तक लागू होनी हैं।

प्रथम वित्त आयोग के अध्यक्ष के.सी. नियोगी थे।

ध्यातव्य है कि 27 नवंबर, 2017 को एन.के. सिंह को 15वें वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।

एन.के. सिंह भारत सरकार के पूर्व सचिव एवं वर्ष 2008-2014 तक बिहार से राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं।
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✅ स्वयं: SWAYAM

स्टडी वेब्स ऑफ एक्टिव लर्निंग फॉर यंग एस्पायरिंग माइंड्स (SWAYAM) एक एकीकृत मंच है जो स्कूल (9वीं- 12वीं) से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक ऑनलाइन पाठ्यक्रम प्रदान करता है।

अब तक SWAYAM पर 2769 बड़े पैमाने के ऑनलाइन कोर्सेज (Massive Open Online Courses- MOOC) बड़े पैमाने पर ओपन ऑनलाइन पाठ्यक्रम) की पेशकश की गई है, जिसमें लगभग 1.02 करोड़ छात्रों ने विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया है।

ऑनलाइन पाठ्यक्रमों का उपयोग न केवल छात्रों द्वारा बल्कि शिक्षकों और गैर-छात्र शिक्षार्थियों द्वारा भी जीवन में कभी भी सीखने के रूप में किया जा रहा है।

इसे swayam.gov.in पर देखा जा सकता है।

NCERT कक्षा IX-XII तक के लिये 12 विषयों में स्कूल शिक्षा प्रणाली हेतु बड़े पैमाने पर ऑनलाइन पाठ्यक्रमों (Massive Open Online Courses- MOOCs) का मॉड्यूल विकसित कर रहा है।

ये 12 विषय अकाउंटेंसी, व्यावसायिक अध्ययन, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, आर्थिकी, इतिहास, भूगोल, गणित, भौतिकी, राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान और समाजशास्त्र हैं

पहली बार में बारह पाठ्यक्रम शुरू किये गए थे इसमें विभिन्न पाठ्यक्रमों में लगभग 22,000 छात्र पंजीकृत थे। दूसरी बार बीस पाठ्यक्रम शुरू किये गए जिसमें लगभग 33,000 छात्र पंजीकृत थे।
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✅ देश की जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट

✔️चर्चा में क्यों?

हाल ही में जारी आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey)2018-19 के अनुसार भारत की जनसंख्या वृद्धि दर अनुमान की अपेक्षा और अधिक तेज़ी से घटेगी।

✔️मुख्य बिंदु

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, आने वाले दो दशकों में भारत अपनी जनसंख्या वृद्धि में तेज़ी से गिरावट दर्ज़ करेगा और इसी के साथ-साथ भविष्य में भारत को जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) भी प्राप्त होगा।

लेकिन इसी समयावधि में भारत के समक्ष अपनी जनसंख्या की बढ़ती उम्र को प्रबंधित करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

👉मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन ने 4 जुलाई, 2019 को, चालू वित्त वर्ष का बजट पेश करने से एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया था।

भारत में 13 राज्य ऐसे हैं जहाँ कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rates- TFR) प्रतिस्थापन दर से भी नीचे है।

बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे घनी आबादी वाले राज्यों में प्रजनन दर, प्रतिस्थापन दर से ऊपर है, लेकिन राहत की बात यह है कि प्रजनन दर पहले की तुलना में तेज़ी से घट रही है।

सर्वेक्षण के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले दो वर्षों में भारत की कुल प्रजनन दर, प्रतिस्थापन दर से कम हो जाएगी।

भारत की कार्य करने योग्य जनसंख्या वर्ष 2021-31 के दौरान 9.7 मिलियन प्रतिवर्ष की दर से बढ़ेगी, जबकि वर्ष 2031-41 के मध्य यह संख्या मात्र 4.2 मिलियन ही रह जाएगी।

वर्ष 2021 से वर्ष 2041 के बीच भारत में स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या में 18.4 प्रतिशत की कमी होगी।

सर्वेक्षण के अनुसार, उपरोक्त कमी के बहुत महत्त्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक परिणाम होंगे।

वर्ष 1971-81 के दौरान भारत की जनसंख्या वृद्धि दर 2.5 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2011-16 में 1.3 प्रतिशत हो गई। आँकड़े दर्शाते हैं कि वर्ष 1970-80 से अब तक भारत की जनसंख्या वृद्धि दर में काफी गिरावट आई है।
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✅ जनसांख्यिकीय लाभांश

(Demographic Dividend)

भारत में युवाओं की एक बहुत बड़ी संख्या ऐसी है जो अकुशल और बेरोज़गार है तथा अर्थव्यवस्था में उनका योगदान न्यूनतम है। किसी भी देश के लिये उसकी युवा जनसंख्या जनसांख्यिकीय लाभांश होती है, यदि वह कुशल, रोज़गारयुक्त और अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाली हो।

✔️प्रजनन दर

प्रजनन दर का अभिप्राय बच्चे पैदा कर सकने की आयु (जो आमतौर पर 15 से 49 वर्ष की मानी जाती है) वाली प्रति 1000 स्त्रियों की इकाई पर जीवित जन्मे बच्चों की संख्या से होता है।

✔️प्रतिस्थापन दर

यह एक ऐसी अवस्था होती है जिसमें जितने बूढ़े लोग मरते हैं उनका खाली स्थान भरने के लिये उतने ही बच्चे पैदा हो जाते हैं। कभी-कभी कुछ समाजों को ऋणात्मक प्रतिस्थापन दर का भी सामना करना पड़ता है; अर्थात् उनकी कुल प्रजनन दर उनकी कुल प्रतिस्थापन दर से कम हो जाती है। जापान, रूस, इटली एवं पूर्वी यूरोप सहित आज विश्व में ऐसे कई सारे देश हैं जहाँ यह स्थिति बनी हुई है।
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