12 July 2019

अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला मध्यस्थता नहीं बढ़ी आगे, तो 25 जुलाई से रोजाना सुनवाई

अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला मध्यस्थता नहीं बढ़ी आगे, तो 25 जुलाई से रोजाना सुनवाई


अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला मध्यस्थता नहीं बढ़ी आगे, तो 25 जुलाई से रोजाना सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में 11 जुलाई 2019 को अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले को लेकर सुनवाई हुई. इस मसले पर याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया था कि अदालत ने मध्यस्थता का जो रास्ता निकाला था, वह काम नहीं कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने जिस पर मध्यस्थता पैनल से रिपोर्ट की मांग की है.

अयोध्या विवाद से संबंधित मामले को लेकर अब 18 जुलाई तक रिपोर्ट सामने आएगी. उसके बाद फिर इस बात पर फैसला किया जाएगा कि इसपर रोजाना सुनवाई होगी या नहीं. सुप्रीम कोर्ट में अब इस मसले की सुनवाई 25 जुलाई को होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि मध्यस्थता पैनल कहता है कि मध्यस्थता कारगर साबित नहीं होने वाली, तो 25 जुलाई के बाद ओपन कोर्ट में रोजाना इसकी सुनवाई की जाएगी. इसका मतलब यह है कि इस मामले में मध्यस्थता जारी रहेगी या नहीं, इसका फैसला 18 जुलाई को ही हो जाएगा.


सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) एफ एम आई कलीफुल्ला तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल के अध्यक्ष हैं. कोर्ट ने कहा कि नवीनतम स्थिति रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद यदि उसे लगेगा कि मध्यस्थता प्रक्रिया विफल रही तब मुख्य अयोध्या विवाद मामले की सुनवाई न्यायालय 25 जुलाई से दिन प्रतिदिन के आधार पर करेगा.

मामला क्या है?

वर्ष 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ की विवादित भूमि को तीन पक्षों सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लल्ला (राम मंदिर) के बीच बराबर बांट दिया था. सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के 30 सितंबर 2010 के फैसले के तहत सुनवाई किया जा रहा है. कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या के विवादित स्थल को रामजन्मभूमि करार दिया था. सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले के विरुद्ध 14 अपील दायर की गई हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने मध्‍यस्‍थता पैनल का किया था गठन:

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में मामले को राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानते हुए एक मध्‍यस्‍थता पैनल का गठन किया था. कोर्ट ने इस मामले में पक्षकारों के बीच आम सहमति की कमी की कारण से तीन सदस्‍यी पैनल का गठन किया था. इस पैनल का प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एफएम कलीफुल्ला को बनाया गया था. इस समिति के अन्य सदस्यों में आध्यत्मिक गुरू और आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू शामिल थे.

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