12 July 2019

भारत की महिला धाविका दुती चंद ने इटली में चल रहे वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया

भारत की महिला धाविका दुती चंद ने इटली में चल रहे वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया


भारत की महिला धाविका दुती चंद ने इटली में चल रहे वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया. दुती चंद ने 30वें समर यूनिवर्सिटी गेम्स में 100 मीटर स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया है.

दुती चंद ने 100 मीटर स्पर्धा में 11.32 सेकंड का समय निकालते हुए रेस जीती. वहीं स्विट्जरलैंड की डेल पोंट (11.33 सेकंड) दूसरे स्थान पर और जर्मनी की क्वायाई (11.39 सेकंड) तीसरे स्थान पर रहीं.

भारत के लिए खेल के इस संस्करण में यह पहला स्वर्ण पदक है. यूनिवर्सिटी गेम्स के इतिहास में इससे पहले किसी भी भारतीय खिलाड़ी ने 100 मीटर स्पर्धा के फाइनल में भी जगह नहीं बनाई थी. हिमा दास के बाद दुती चंद दूसरी महिला धाविका हैं जिन्होंने ग्लोबल इवेंट मे स्वर्ण पदक जीता है. हिमा दास ने साल 2018 में वर्ल्ड जूनियर एथलेटिक्स चैम्पियशिप के 400 मीटर स्पर्धा प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था.

राष्ट्रपति ने दुती चंद को दी बधाई

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इस मौके पर दुती चंद को बधाई दी. दुती चंद ने राष्ट्रपति को धन्यवाद देते हुए कहा कि वे ओलिम्पिक में भी अपना सर्वश्रेष्ठ देकर स्वर्ण पदक जीतने का प्रयास करेंगी.

खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने भी दुती चंद को बधाइयां दी

दुती चंद को खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने भी बधाइयां दी हैं. साथ ही किरेन रिजिजू ने दुती चंद के प्रतियोगिता का वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है.

दो साल का प्रतिबंध लगा था

दुती चंद को अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ (आईएएएफ) की हाइपरएंड्रोजेनिज्म नीति (जिसके तहत पुरूष हार्मोन की सीमा अधिक पाये जाने पर महिला खिलाड़ी को प्रतियोगिता में भाग लेने से रोका जाता है) के कारण 2014-15 में खेलने की अनुमति नहीं दी. इसके कारण दुती चंद साल 2014 कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स खेलों में भाग नहीं ले पाई थी.

दुती चंद:

•   दुती चंद का जन्म 03 फरवरी 1996 को ओडिशा के चाका गोपालपुर गांव में हुआ था.

•   वे एशियाई खेलों में भी दो रजत पदक जीत चुकी है.

•   दुती चंद इन दिनों टोक्यो ओलिंपिक के लिए विदेश में ट्रेनिंग ले रही हैं.

•   उन्होंने कजाखिस्तान के अलमाटी में 26वें जे कोसनोव मेमोरियल मीट में ओलंपिक में जगह बनाते हुए खुद के राष्ट्रीय रिकॉर्ड में भी सुधार किया..

🇮🇳❄️विश्व जनसंख्या दिवस 2019: क्यों मनाया जाता है विश्व जनसंख्या दिवस?
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इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को बढ़ती जनसंख्या से संबंधित विभिन्न विषयों से परिचित कराना है. विभिन्न जागरुकता कार्यक्रम आयोजित करके लोगों को परिवार नियोजन, मातृ स्वास्थ्य, लिंग समानता, गरीबी और मानव अधिकारों के प्रति जागरुक किया जाता है.


11 जुलाई 2019: विश्व जनसंख्या दिवस👇🇮🇳

विश्व भर में 11 जुलाई 2019 को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया गया. विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर देश-विदेश में विभिन्न जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किये गये. इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को बढ़ती जनसंख्या से संबंधित विभिन्न विषयों से परिचित कराना है.

विभिन्न जागरुकता कार्यक्रम आयोजित करके लोगों को परिवार नियोजन, मातृ स्वास्थ्य, लिंग समानता, गरीबी और मानव अधिकारों के प्रति जागरुक किया जाता है. इस दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होता है जिनमें जनसंख्या वृद्धि की वजह से होने वाले खतरे के प्रति लोगों को आगाह किया जाता है.

जनसंख्या वृद्धि एक गंभीर मुद्दा👇🇮🇳

जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं. विश्व भर के कई देशों के सामने जनसंख्या विस्फोट बड़ी समस्या का रूप ले चुकी है. मुख्य तौर पर विकासशील देशों में यह गहरी चिंता का विषय बनता जा रहा है. इसको नियंत्रित करने हेतु लंबे समय से कोशिशें की जा रही हैं.

मुख्य बिंदु:👇🇮🇳

•   चीन और भारत विश्व के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश हैं. इन दोनों देशों में पूरी विश्व की आबादी के तीस प्रतिशत से भी ज्यादा लोग रहते हैं. आज के समय में नाइजीरिया सबसे तेज गति से जनसंख्या वृद्धि करने वाला देश है.

•   नाइजीरिया जनसंख्या के मामले में भले ही अभी 7वें नंबर पर है, लेकिन यह साल 2050 से पहले अमेरिका को पीछे छोड़ कर तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है. विश्व की एक बड़ी आबादी आज भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत मूल सुविधाओं से दूर है. इसका मुख्य कारण लगातार बढ़ती आबादी है.

•   भारत में परिवार नियोजन की महत्व को समझते हुए अब सीमित परिवार पर विशेष जोर दिया जा रहा है. इसी तरह से आबादी बढ़ती गई तो आने वाले समय में न केवल आवास और रोजगार की कमी होने वाली है बल्कि लोगों को खाने के लिए अनाज और पीने हेतु पानी की कमी होने वाली है.

•   एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में 400 करोड़ लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है जिसमें 25 प्रतिशत भारतीय भी शामिल हैं.


विश्व जनसंख्या दिवस भारत के लिए महत्वपूर्ण क्यों?👇🇮🇳

विश्व जनसंख्या दिवस भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्व की करीब साढ़े सात अरब आबादी में से करीब 130 करोड़ लोग भारत में रहते हैं. भारत की जनसंख्या वृद्धि की सही तरीके से बढ़ोतरी के लिए यह दिवस भारत के लिए महत्वपूर्ण है.


पृष्ठभूमि👇🇮🇳

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संचालक परिषद (यूएनडीपी) द्वारा साल 1989 से इसकी शुरुआत की गयी. इस दिवस को उस समय शुरू किया गया जब विश्व की जनसंख्या पांच अरब के आसपास हो गई थी. इस दिवस के तहत समय-समय पर प्रजनन संबंधी स्वास्थ देख-रेख की माँग, बच्चों के स्वास्थ्य तथा गरीबी को घटाने के विषयों पर कार्यक्रम आयोजित किये जाते रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र द्वारा दिसंबर 1990 में प्रस्ताव 45/216 पारित करके प्रत्येक साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाये जाने का निर्णय लिया गया.

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