20 August 2019

20 अगस्त 2019 को चंद्रयान-2 को चांद की पहली कक्षा में सफलतापूर्वक दाखिल करा दिया

20 अगस्त 2019 को चंद्रयान-2 को चांद की पहली कक्षा में सफलतापूर्वक दाखिल करा दिया


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 20 अगस्त 2019 को चंद्रयान-2 को चांद की पहली कक्षा में सफलतापूर्वक दाखिल करा दिया है. इस दौरान चंद्रयान की गति को 10.98 किमी प्रति सेकंड से कम कर लगभग 1.98 किमी प्रति सेकंड किया गया. 
इसरो के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 को सुबह 8.30 से 9.30 बजे के बीच चांद की कक्षा LBN#1 में प्रवेश कराया. चंद्रयान-2, अब 118 किमी की एपोजी (चांद से कम दूरी) और 18078 किमी की पेरीजी (चांद से ज्यादा दूरी) वाली अंडाकार कक्षा में अगले 24 घंटे तक चक्कर लगाएगा.
मिशन का उद्देश्य
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य चांद की सतह का नक्शा तैयार करना, खनिजों की मौजूदगी का पता लगाना, चंद्रमा के बाहरी वातावरण को स्कैन करना और किसी न किसी रूप में पानी की उपस्थिति का पता लगाना है. इस मिशन  एक और उद्देश्य चांद को लेकर हमारी समझ को और बेहतर करना और मानवता को लाभान्वित करने वाली खोज करना है.
सबसे मुश्किल अभियानों में से एक
चंद्रयान-2 की गति में 90 प्रतिशत की कमी इसलिए की गई है जिससे की वह चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के प्रभाव में आकर चांद से न टकरा जाए.
इसरो के अनुसार, यह इस मिशन के सबसे मुश्किल अभियानों में से एक था. यह सबसे सबसे मुश्किल अभियानों में से एक था, क्योंकि अगर सेटेलाइट चंद्रमा पर उच्च गति वाले वेग से पहुंचता है, तो वह उसे उछाल देगा और ऐसे में वह अंतरिक्ष में खो जाएगा, लेकिन यदि वह धीमी गति से पहुंचता है तो चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण चंद्रयान 2 को खींच लेगा और वह सतह पर गिर सकता है.

मुख्य बिंदु:
• चंद्रयान-2 के चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने के बाद इसरो कक्षा के अंदर स्पेसक्रॉफ्ट की दिशा में चार बार (21 अगस्त, 28 अगस्त एवं 30 अगस्त तथा 01 सितंबर) और परिवर्तन करेगा.
• इसके बाद चंद्रयान-2 चंद्रमा के ध्रुव के ऊपर से गुजरकर उसके सबसे नजदीक 100 किलोमीटर की दूरी के अपने अंतिम कक्षा में पहुंच जाएगा.
• अंतिम कक्षा में पहुंचने के बाद विक्रम लैंडर 2 सितंबर को चंद्रयान-2 से अलग होकर चंद्रमा की सतह पर उतरेगा.
• इसरो के अनुसार, चंद्रमा की सतह पर 07 सितंबर 2019 को लैंडर से उतरने से पहले धरती से दो कमांड दिए जाएंगे, जिससे की लैंडर की गति एवं दिशा सुधारी जा सके और वे हल्के से सतह पर उतरे.
भारत ऐसा करने वाला चौथा देश:
इसरो के योजना के मुताबिक, लैंडर और रोवर की लैंडिंग चांद की सतह पर 07 सितंबर 2019 को होगी. लैंडर-रोवर को चांद के दक्षिणी ध्रुव के उस हिस्से पर उतारा जाएगा, जहां अभी तक कोई यान नहीं उतरा है. भारत चांद की सतह पर लैंडिंग के बाद ऐसा करने वाला विश्व का चौथा देश बन जाएगा. भारत से पहले अमेरिका, रूस और चीन अपने यान चांद पर उतार चुके हैं.
पृष्ठभूमि
चंद्रयान-2 को 22 जुलाई 2019 को धरती पर से अंतरिक्ष में रवाना किया गया था. इसका प्रक्षेपन रॉकेट जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच वेहिकल- मार्क 3 (जीएसएलवी एमके 3) से किया गया था. इस स्पेसक्राफ्ट के तीन भाग हैं. इस भाग में ऑर्बिटर, लैंडर 'विक्रम' और रोवर 'प्रज्ञान' शामिल हैं.

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