13 February 2020

राजस्थान की लोक कलाएं।।

राजस्थान की लोक कलाएं।।

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मांडणा__ मांगलिक अवसरों पर महिलाओं द्वारा बनाए गए खड़िया हिरमिच और गेरू की सहायता से बने अलंकरण

सातीये___इन्हे बच्चों के जन्म के अवसर पर बनाया जाता है

ताम___यह मांडणा विवाह के अवसर पर लग्न मंडप के समय बनाया जाता है

कठपुतली ____ मारवाड़ इन नटों का मुख्य स्थल है 
**कठपुतली बनाने का काम उदयपुर और चित्तौड़गढ़ में होता है

तोरण___ विवाह के अवसर पर दुल्हन के घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर लटकाए जाने वाली लकड़ी की कलाकृति जिसके शीर्ष पर मयूर बना होता है

चोपड़े __ विवाह एवं अन्य मांगलिक अवसरों पर कुमकुम अक्षत चावल आदि रखने हेतु प्रयुक्त लकड़ी का पात्र! 

बाजोट __भोजन पूजा के थाल आदि के नीचे रखी जाने वाली चौकी

बेवाण___ लकड़ी के बने मंदिर व देव विमान जिनकी देव झुलनी एकादशी को झांकी निकाली जाती है

थापा__ हाथ की अंगुलियों के थप्पे देकर दीवार पर जो चित्र बनाए जाते हैं वे थापे कहलाते हैं

पाने___विभिन्न देवी-देवताओं के कागज पर   बने -बड़े चित्र पाने  कहलाते हैं

वील___ राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में घर की छोटी-मोटी चीजों को सुरक्षित है रखने हेतु बनाई गई मिट्टी की चित्रित आकृति वील कहलाती है

बटे - वड़े  चारों तरफ से गोबर की लिपाई से बंद चुके अपनों के ढेर को बटे वडा कहते हैं

कोठियां _राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में अनाज संग्रहण हेतु उपयुक्त मिट्टी के कलात्मक पात्र

सोहरिया__ भोजन सामग्री रखने के मिट्टी के बने कलात्मक पत्थर जो ग्रामीण अंचलों में प्रचलित है

ओका-नोका- गुणा___ व्याधि निवारण हेतु ग्रामीण अंचलों में गोबर से बनाए जाने वाला आकार जो चेचक निकलने पर विशेषत: बनाकर पूजा जाता है

मोण___ मेड़ता क्षेत्र में बनाए जाने वाले मिट्टी के बड़े मटके

भराड़ी__ आदिवासी भील ऑन द्वारा लड़की के विवाह पर घर की दीवार पर बनाए जाने वाला लोक देवी का चित्र

गोरबंद ___ऊंट के गले का आभूषण! इसके संबंध में गोरबंद नखरालो लोकगीत प्रसिद्ध है

सूत कातने के चरखे को रहन्टा और भैरैला भी कहते हैं

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