23 June 2020

विश्व का भूगोल - पठार

विश्व का भूगोल - पठार

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धरती या धरातल का विशिष्ट स्थल रूप जो अपने आस पास की जमींन से पर्याप्त ऊँचा होता है,और जिसका ऊपरी भाग चौड़ा और सपाट होता है, पठार कहलाता है। सागर तल से इनकी ऊचाई 300 मीटर तक होती हैं लेकिन केवल ऊचाई के आधार पर ही पठार का वर्गीकरण नही किया जाता हैं।

पठार इस धरातल का सबसे महत्वपूर्ण स्थल है. सम्पूर्ण धरातल के 33% भाग पर इनका विस्तार पाया जाता हैं।

उत्पत्ति के आधार पर पठारों का वर्गीकरण :

▪️1. अंतपर्वतीय पठार (Inter-Mountain Plateau)
 
ये पठार चारों ओर से पर्वतों से घिरे होते हैं । भूपटल के सर्वोच्च, सर्वाधिक विस्तृत एवं अत्यधिक जटिल पठार इसी श्रेणी में आते हैं । बोलीविया व पेरू के पठार, एशिया माइनर का पठार (ईरान), कोलंबिया का पठार (स.रा. अमेरिका), मैक्सिको का पठार इसके उदाहरण
हैं ।

विश्व का सबसे ऊँचा पठार तिब्बत का पठार (5,000 मी. ऊँचा) इस प्रकार के पठार का सर्वप्रमुख उदाहरण है, जो उत्तर में क्युनलुन व दक्षिण में हिमालय पर्वतों से घिरा हुआ है ।

▪️2. गिरिपद पठार (Mountain Plateau):

पर्वतों के आधार पर स्थित पठारों को गिरिपद या पर्वतीय पठार कहा जाता हैं । ये एक ओर उच्च पर्वतों से घिरे होते हैं तथा दूसरी ओर से ये सागर या मैदान से घिरे होते हैं । संयुक्त राज्य अमेरिका के पीडमांट पठार व दक्षिण अमेरिका के पैटागोनिया पठार इस प्रकार के पठार का सर्वोत्तम उदाहरण है ।
 
▪️3. गुम्बदाकार पठार (Domed Plateau):

भूपटल में वलन की क्रिया द्वारा गुम्बदनुमा उत्थान के कारण इस प्रकार के पठार बनते हैं । स.रा. अमेरिका का ओजार्क पठार, भारत का छोटानागपुर पठार, रामगढ़ पठार इसी के उदाहरण हैं ।

▪️4. महाद्वीपीय पठार (Continental Plateau):

ये प्रायः पर्वतीय भागों से दूर किन्तु सागरीय तटों या मैदानों से घिरे होते हैं । इनकी उत्पत्ति धरातल के ऊपर उठने या लावा के अपरिमित निक्षेप से होती हैं । इन पठारों को शील्ड भी कहा जाता है । साइबेरिया शील्ड, बाल्टिक या फेनो-स्कैंडिये शील्ड, लॉरेंशियन या कनाडियन शील्ड ब्राजील शील्ड इसी प्रकार के पठार के उदाहरण हैं ।
 
▪️5. ज्वालामुखी पठार (Volcanic Plateau):

ज्वालामुखी के निस्मृत लावा के जमाव के कारण बने सपाट विस्तृत भू-भाग को ज्वालामुखी पठार कहते है । दरारी उद्‌भेदन इनकी उत्पत्ति का मुख्य कारण हैं । भारत में दक्कन का लावा पठार एवं स.रा. अमेरिका में कोलंबिया-स्नैक पठार लावा निर्मित पठार के सर्वोत्तम उदाहरण हैं ।

अपरदन चक्र के आधार पर वर्गीकरण :

▪️i. तरूण पठार (Young Plateau):

जिस पर अपरदन की प्रक्रिया काफी सक्रिय होती है । संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलोरैडो पठार व इदाहो पठार इसके उदाहरण हैं ।

▪️ii. प्रौढ़ पठार (Old Plateau):

संयुक्त राज्य अमेरिका का अप्लेशियन पठार परिपक्व पठार का श्रेष्ठ उदाहरण  है ।

▪️iii. जीर्ण पठार (Decrepit Plateau):

जहाँ अत्यधिक अपरदन के कारण पठार के उच्चावच घिसकर प्रायः समाप्त हो जाते हैं तथा पठार एक पेनीप्लेन के रूप में परिवर्तित हो जाता है । उदाहरण- मध्य राँची का पठार ।

▪️iv. पुनर्युवीनत पठार (Renewed Plateau):

यदि कोई पठार जीर्णावस्था की प्राप्ति के बाद पुनः उभार के कारण अधिक ऊँचाई प्राप्त कर ले तो इस प्रकार के पठार का निर्माण होता है । सं.रा. अमेरिका का मिसौरी पठार व राँची का पाट-पठार इसका उत्तम उदाहरण है ।

विश्व के प्रमुख पठार :

▪️ग्रीनलैंड का पठार: अंध (अटलांटिक) महासागर के उत्तरी भाग में लगभग 2175600 वर्गकिलोमीटर क्षेत्र में बर्फ से ढका विशाल पठार है, इसे ग्रीनलैंड का पठार कहते हैं.

▪️कोलंबिया का पठार: यह अमेरिका के ऑरेगोन, वाशिंग्टन और इडाहो राज्यों के मध्य 462500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है. यह कोलंबिया का पठार कहलाता है.

▪️मैक्सिको का पठार: यह पठार पश्चिमी सियारामाद्रे और पूर्वी सियारामाद्रे पर्वत श्रेणियों के मध्य स्थित है.

▪️तिब्बत का पठार: यह हिमालय के उत्तर ओर क्युनलून पर्वत के दक्षिण में 4000 से 5000 मीटर की उंचाई पर स्थित है. यह विश्व के सबसे ऊँचे पठारों में से एक है.

▪️मंगोलिया का पठार: यह चीन के उत्तरी मध्य भाग में मंगोलिया राज्य में स्थित है.

▪️ब्राजील का पठार: यह दक्षिण अमेरिका के मध्य पूर्वी भाग में त्रिभुजाकार रूप में स्थित है.

▪️बोलिविया का पठार: यह पठार 800 किलोमीटर लम्बा और 128 किलोमीटर चौड़ा है. इसकी औसत ऊँचाई 3110 मीटर है. यह बोलिविया के इंडीज पर्वत माला क्षेत्र में विस्तृत रूप में फैला है

▪️अलास्का का पठार: इसका निर्माण युकन और उसकी सहायक नदियों द्वारा हुआ है. अत: इसे यूकन का पठार भी कहा जाता है. कनाडा की ओर इसकी उंचाई लगभग 900 मीटर है. 

▪️ग्रेट बेसिन का पठार: यह कोलम्बिया पठार के दक्षिण में कोलेरेडो और कोलम्बिया नदियों के मध्य 525000 वर्गकिलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है.

▪️कोलोरेडो का पठार: यह ग्रेट बेसिन के दक्षिण में स्थित है तथा इसका विस्तार यूटा और अरिजोना राज्य में है.

▪️दक्कन का पठार: यह पठार दक्षिण भारत में स्थित है. इसे तीन ओर से पर्वत श्रेणियों ने घेर रखा है. इसके पूर्व में पूर्वी घाट, पश्चिम में पश्चिमी घाट और उत्तर में विन्ध्याचल और सतपुड़ा पर्वत श्रेणिया हैं.

▪️इरान का पठार: इसे एशिया माइनर का पठार या इरान का मध्यवर्ती पठार भी कहते हैं. इसकी औसत उंचाई 900-1500 मीटर के मध्य है.

▪️अरब का पठार: यह दक्षिण-पश्चिम एशिया में स्थित है. इसके पूर्व में फारस की खाड़ी, पश्चिम में लाल सागर, उत्तर पश्चिम में भूमध्य सागर और दक्षिण में अरब सागर स्थित है.

▪️अनातोलिया का पठार: यह टर्की के एंटिक और टारस श्रेणियों के मध्य स्थित है. इसे टर्की का पठार भी कहते हैं. इसकी औसत ऊँचाई 800 मीटर है.

▪️अबीसीनिया का पठार: यह पठार पूर्वी अफ्रीका के इथोपिया एवं सोमालिया के क्षेत्र में विस्तृत रूप में फैला है.

▪️मेडागास्कर का पठार: मेडागास्कर द्वीप अफ्रीका के दक्षिण पूर्व हिन्द महासागर में  स्थित है. इस द्वीप का मध्यवर्ती भाग पठारी है, जिसे मेडागास्कर या मालागासी का पठार कहा जाता है.

▪️ऑस्ट्रेलिया का पठार: ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी भाग में ऑस्ट्रेलिया का पठार स्थित है. इसकी सामान्य ऊँचाई 180 से 600 मीटर के मध्य है. इस पठार का दक्षिणी भाग मरुस्थलीय है.

▪️चियापास का पठार: यह दक्षिणी मैक्सिको में प्रशांत महासागर के तट पर स्थित है. इसके उत्तर में तबास्को, दक्षिण-पश्चिम में तहुआ-न्टेपेक की खाड़ी, पूर्व में ग्वाटेमाला और पश्चिम में ओलस्का और बेराक्रुज स्थित है.

▪️मेसेटा का पठार: स्पेन के आइबेरियन प्रायद्वीप पर मेसेटा का पठार स्थित है. इस पठार की औसत उंचाई 610 मीटर है.

▪️इंडोचीन का पठार: यह दक्षिण-एशिया में पूर्वी प्रायद्वीप पर स्थित है. इस भाग पर साल्विन, सीकांग, मीकांग, मीनाम आदि नदियाँ प्रवाहित होती हैं
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