17 September 2020

HINDI QUIZ 15.09.2020

HINDI QUIZ 15.09.2020

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1.निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः

1.कल्पना चावला के नाम पर रखा अमेरिकी कंपनी ने स्पेसक्राफ्ट का नाम.

2.NG -16 मिशन के लिए यह सिग्नस अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष स्टेशन तक लगभग 3,529 किलोग्राम माल पहुंचाएगा.

उपर्युक्त में से कौन सा कथन सत्य है?

A. केवल 1

B. केवल 2

C. 1 व 2, दोनों

D. दोनों कथन असत्य है।

2.निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः

1.केंद्र सरकार ने प्याज के निर्यात पर लगाया बैन.

2.सरकार ने इससे पहले सितंबर 2017 में भी प्याज के निर्यात पर रोक लगाई थी.

3.भारतीय अर्थव्यवस्था किसी दूसरी अर्थव्यवस्था की तरह मांग और आपूर्ति के आधार पर काम करती है। कीमतें स्पष्ट           रूप से मांग और आपूर्ति द्वारा तय की जाती हैं।

उपर्युक्त दिया गया कौन सा कथन सही हैं ?

A. 1 और 2 सही हैं

B. 1 और 3 सही हैं

C. 2 और 3 सही हैं

D. उपर्युक्त सभी सही हैं

ANSWERS:-

उत्तरः 1)A       

व्याख्या

अमेरिका ने अपने लॉन्च होने वाले स्पेसक्राफ्ट (US Spacecraft) का नाम भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री (Astraunat) कल्पना चावला (Kalpana Chawla) के नाम पर रखा है. यह भारत और भारतीयों के लिए सम्मान की बात है.

अमेरिकी अंतरिक्ष यान का नामकरण “एस.एस. कल्पना चावला”

  • अपने इस फैसले के बारे में सूचित करते हुए, नॉर्थरोप ग्रुमैन ने आगे यह कहा कि, कल्पना चावला को इतिहास में उनके प्रमुख स्थान को सम्मान प्रदान करने के लिए चुना गया, क्योंकि वे अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं.
  • इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि, जबकि कल्पना चावला ने अंतरिक्ष कार्यक्रम की सेवा में अंतिम बलिदान दिया था, उनकी विरासत अभी भी उनके साथी अंतरिक्ष यात्रियों और उन लोगों के माध्यम से कायम है जो उनके नक्शेकदम पर चलने के लिए प्रेरित हैं.
  • कोलंबिया में किए गए उनके अंतिम शोध ने अंतरिक्ष यान के दौरान अंतरिक्ष यात्री के स्वास्थ्य और सुरक्षा को समझने में हमारी काफी मदद की है.

एस.एस. कल्पना चावला” कब लॉन्च किया जायेगा?

  • “एस.एस. कल्पना चावला“ कैप्सूल 29 सितंबर, 2020 को वर्जीनिया में नासा के वॉलॉप्स फ्लाइट फैसिलिटी में MARS- मिड-अटलांटिक रीजनल स्पेसपोर्ट से एक नॉर्थ ग्रुम्मन एंटेर्स रॉकेट पर NG-14 मिशन पर लॉन्च किया जायेगा.
  • NG -14 मिशन के लिए यह सिग्नस अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष स्टेशन तक लगभग 3,629 किलोग्राम माल पहुंचाएगा.
  • अगले दो दिन बाद इस अंतरिक्ष यान का आगमन होगा और यह अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ जाएगा.

नासा में कल्पना चावला

  • कल्पना चावला ने वर्ष 1988 में नासा में अपने करियर की शुरुआत एम्स रिसर्च सेंटर, कैलिफ़ोर्निया में एक पावर्ड-लिफ्ट कम्प्यूटेशनल फ्लूड डायनामिक्स शोधकर्ता के तौर पर की थी.
  • उनका काम ’ग्राउंड इफेक्ट’ में उड़ान भरने वाले विमानों द्वारा सामना किए जाने वाले जटिल वायु प्रवाह के अनुकरण पर केंद्रित था.
  • कल्पना चावला ने वर्ष 1993 में ओवरसेट मेथड्स इंक में बतौर उपाध्यक्ष और वायुगतिकी में एक शोधकर्ता पद ग्रहण किया.
  • अप्रैल, 1991 में एक प्राकृतिक अमेरिकी नागरिक बनने के बाद, उसने नासा के अंतरिक्ष यात्रियों की वाहिनी के लिए आवेदन किया. दिसंबर, 1994 में उन्हें चयनित किया गया और वर्ष 1995 में ह्यूस्टन में जॉनसन स्पेस सेंटर में समूह 15 में शामिल एक अंतरिक्ष यात्री उम्मीदवार के तौर पर उन्होंने रिपोर्ट किया.
  • कल्पना चावला को नवंबर, 1996 में स्पेस शटल कोलंबिया में, STS – 87 में एक मिशन विशेषज्ञ के तौर पर नियुक्त किया गया और वे अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली भारतीय मूल की पहली महिला बन गई.
  • उनका दूसरा स्पेसफ्लाइट अनुभव वर्ष, 2001 में आया था जब उन्हें STS -107 के चालक दल के लिए चुना गया था.
  • यह उड़ान लगभग अनुसंधान और विज्ञान के लिए समर्पित थी जिसके तहत लगभग 80 प्रयोग पूरे किये गये.

कल्पना चावला के बारे में

  • कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च, 1962 को हरियाणा के करनाल में हुआ था.
  • उन्होंने वर्ष 1982 में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से वैमानिकी इंजीनियरिंग में विज्ञान विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की थी.
  • अपनी स्नातक शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए वह संयुक्त राज्य अमेरिका चली गईं और वर्ष 1984 में उन्होंने टेक्सास विश्वविद्यालय से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की.
  • उन्होंने वर्ष 1988 में कोलोराडो में विश्वविद्यालय से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री भी हासिल की.
  • कल्पना चावला के पास एकल और बहु-इंजन हवाई जहाज, ग्लाइडर और सी-प्लेन के लिए वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस भी था.
  • वे एक प्रमाणित उड़ान प्रशिक्षक भी थी.
  • वर्ष 2003 में STS-107 मिशन के दौरान उनकी जान चली गई, जब अंतरिक्ष यान कोलंबिया पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश करने पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था.

उत्तरः 2)B

व्याख्या

सरकार ने प्याज की सभी किस्मों के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। इसकी वजह घरेलू बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर नियंत्रण रखना है।

निर्यात पर प्रतिबंध क्यों?

  • सरकार द्वारा प्रतिबन्ध लगाने के पीछे दो बड़े कारण हैं।
  • हाल के दिनों में प्याज की थोक कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है।
  • प्याज एक दैनिक उपभोग की वस्तु है, अतः इसकी मूल्य वृद्धि का सीधा असर लोगों पर पड़ा।
  • इसका दूसरा कारण सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी उच्च सीएफपीआई मूल्य है।

निर्यात पर बैन पहले भी लगा था

  • सरकार ने इससे पहले सितंबर 2019 में भी प्याज के निर्यात पर रोक लगाई थी.
  • उस समय मांग और आपूर्ति में बहुत ज्यादा अंतर आने से प्याज के भाव काफी ज्यादा बढ़ गए थे.
  • महाराष्ट्र जैसे बड़े प्याज उत्पादक राज्यों में बारिश और बाढ़ के चलते प्याज की फसल को भारी नुकसान पहुंचा था

बाजार में प्याज महंगा क्यों हैं?

  • इस वर्ष देश में अगस्त में भारी वर्षा हुई। इसने उस तैयार फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है जो इस साल भारतीय बाजार में आनी थी।
  • मध्य अप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी स्टॉक बुरी तरह प्रभावित हुआ।
  • क्या निर्यात प्रतिबंध से कीमत कम होगी?
  • केंद्र सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद बाजार में प्याज की कीमत में तेज गिरावट की उम्मीद है।
  • बाजार और व्यापारियों ने अनुमान लगाया कि एक सप्ताह के भीतर कीमत फिर से बढ़ सकती है।
  • नई फसल नवंबर के बाद ही आएगी।

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 क्या है और हाल ही में इसमें क्या बदलाव किए गए हैं?

  • भारतीय अर्थव्यवस्था किसी दूसरी अर्थव्यवस्था की तरह मांग और आपूर्ति के आधार पर काम करती है। कीमतें स्पष्ट रूप से मांग और आपूर्ति द्वारा तय की जाती हैं।
  • उपभोक्ता के हितों की रक्षा के लिए कुछ कानून भारत सरकार को बाजार में हस्तक्षेप करने का अधिकार देते हैं।
  • आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 ऐसे अधिनियमों में से एक है, जो सरकार को उचित मूल्य पर उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को विनियमित करने का अधिकार देता है।
  • हाल के बदलाव में, केंद्र सरकार ने युद्ध या प्राकृतिक आपदा जैसी चरम स्थितियों में वस्तुओं के स्टॉक की सीमा और आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है।

भारत से सबसे ज्यादा प्याज का निर्यात

  • भारत से सबसे ज्यादा प्याज का निर्यात श्रीलंका, बांग्लादेश, मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को होता है. अब जब प्याज के निर्यात पर रोक लग गयी है तो इससे देश में प्याज की कमी दूर होगी और इसकी कीमतों में गिरावट आएगी.
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